Jagannath Puri: पुरी का जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 46 साल बाद खुला: जानें कारण और इतिहास

पुरी का जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार पुरी का जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार पुरी का जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार आज 46 साल बाद खोला गया है। राज्य सरकार ने आभूषणों की सूची बनाने के लिए यह कदम उठाया

Jagannath Puri:  पुरी का जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 46 साल बाद खुला: जानें कारण और इतिहास

रत्न भंडार का महत्व:

12वीं शताब्दी में बने पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के गहने रत्न भंडार में रखे गए हैं। इसे आज 46 साल बाद खोला गया है। राज्य सरकार ने आभूषणों की सूची बनाने के लिए यह कदम उठाया है। इससे पहले यह 1978 में खोला गया था।

भंडार में गहने:

रत्न भंडार दो भागों में बंटा है:

1.भीतरी भंडार: उपयोग में न आने वाले गहने।

2.बाहरी भंडार: त्योहारों में उपयोग होने वाले गहने।

खजाना:

भीतरी कक्ष में 50.6 किलो सोना और 134.05 किलो चांदी है, जिनका कभी उपयोग नहीं हुआ। बाहरी कक्ष में 95.32 किलो सोना और 19.48 किलो चांदी है, जो त्योहारों में उपयोग होते हैं। दैनिक अनुष्ठान के लिए वर्तमान कक्ष में 3.48 किलो सोना और 30.35 किलो चांदी है।

चाबी गायब का मामला:

2018 में जांच के दौरान पता चला कि रत्न भंडार की चाबियां गायब हैं। इस पर विवाद हुआ और न्यायिक जांच के आदेश दिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे को उठाया था।

अब क्यों खोला जा रहा:

1978 के बाद से मंदिर के पास कितनी संपत्ति आई, इसका कोई अनुमान नहीं है। हाल के चुनावों में यह बड़ा मुद्दा बना और भाजपा ने वादा किया कि सरकार बनने पर खजाना खोला जाएगा।

खोलने की प्रक्रिया:

ओडिशा सरकार ने रत्न भंडार खोलने के लिए एक नई उच्च स्तरीय समिति गठित की है। सभी वस्तुओं का डिजिटल डॉक्यूमेंट बनाया जाएगा। सांप पकड़ने के विशेषज्ञ भी बुलाए गए हैं क्योंकि मान्यता है कि भंडार की रक्षा सांप करते हैं।

जगन्नाथ मंदिर के चार द्वार:

सिंह द्वार (शेर का द्वार): मुख्य प्रवेश द्वार, मोक्ष का प्रतीक।
व्याघ्र द्वार (बाघ का द्वार): धर्म का पालन करने की शिक्षा, विशेष भक्तों के लिए।
हस्ति द्वार (हाथी का द्वार): माता लक्ष्मी का वाहन, ऋषियों के प्रवेश के लिए।
अश्व द्वार (घोड़े का द्वार): विजय का प्रतीक, भगवान जगन्नाथ और बलभद्र युद्ध की मुद्रा में सवार।
इन द्वारों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, जो जगन्नाथ मंदिर के गौरव को दर्शाते हैं।