इंडेन गैस एजेंसी की बड़ी धोखाधड़ी उजागर, बिना सिलिंडर दिए भेजा डिलीवरी का मैसेज लगा ₹27.81 लाख का भारी जुर्माना

इंडेन गैस एजेंसी की बड़ी धोखाधड़ी उजागर, बिना सिलिंडर दिए भेजा डिलीवरी का मैसेज लगा ₹27.81 लाख का भारी जुर्माना

नजीबाबाद (बिजनौर)। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। नजीबाबाद स्थित इंडेन गैस एजेंसी (मैसर्स नजीबाबाद गैस सर्विस) की मनमानी और हेरफेर पर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने कड़ा रुख अपनाया है। कंपनी ने उपभोक्ता को बिना एलपीजी (LPG) गैस सिलिंडर डिलीवर किए ही 'सफल डिलीवरी' का भ्रामक मैसेज भेजने के आरोप में एजेंसी पर 27 लाख 81 हजार 572 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना (अर्थदंड) ठोक दिया है।

'खेल' का ऐसे हुआ खुलासा बिना डिलीवरी आया मैसेज

यह पूरा मामला तब खुला जब नजीबाबाद के एक जागरूक उपभोक्ता अतुल बहादुर सिंह ने अपने घर के लिए एलपीजी गैस सिलिंडर बुक कराया। बुकिंग के कुछ समय बाद सिलिंडर तो उनके घर नहीं पहुंचा, लेकिन उनके मोबाइल पर एक मैसेज आ गया कि उनकी डिलीवरी सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है।

इस भ्रामक मैसेज को देखकर उपभोक्ता दंग रह गए। उन्होंने तुरंत इस धोखाधड़ी के खिलाफ मुख्यमंत्री के आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल और सीधे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा दी।

कालाबाजारी और अवैध वसूली का गंभीर आरोप

उपभोक्ता अतुल बहादुर सिंह ने अपनी शिकायत में गैस एजेंसी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि मैसर्स नजीबाबाद गैस सर्विस बड़े पैमाने पर गैस सिलिंडरों की कालाबाजारी कर रही है। आम उपभोक्ताओं के हिस्से का सिलिंडर कागजों में डिलीवर दिखाकर, उसे बाहर अतिरिक्त (ब्लैक) दामों पर अवैध रूप से बेचा जा रहा है।

 सरकारी विभाग ने खड़े किए हाथ, पर IOC ने लिया कड़ा एक्शन

शिकायत दर्ज होने के बाद शुरुआती दौर में स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों में हीलाहवाली देखने को मिली। जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) और आपूर्ति निरीक्षक ने शुरुआत में अपने स्तर से इस मामले का निस्तारण करने में असमर्थता जताते हुए हाथ खड़े कर दिए थे। हालांकि, बाद में नजीबाबाद के पूर्ति निरीक्षक ने मामले की जांच रिपोर्ट तैयार कर डीएसओ को सौंपी।

इसके बाद असली एक्शन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के बिक्री अधिकारी (Sales Officer) की तरफ से हुआ। कंपनी के अधिकारियों ने जब इस मामले की जमीनी और डिजिटल जांच की, तो उपभोक्ता के आरोप 100% सही पाए गए। एजेंसी के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि बिना सिलिंडर पहुंचे उपभोक्ता को डिलीवरी का मैसेज कैसे गया।