खंडवा: उर्दू शिक्षक की नियुक्ति को लेकर 40 छात्राओं का विरोध, टीसी की मांग

Khandwa: उर्दू माध्यम के स्कूल में गैर-उर्दू भाषी शिक्षकों की नियुक्ति विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हानिकारक हो सकती है

खंडवा: उर्दू शिक्षक की नियुक्ति को लेकर 40 छात्राओं का विरोध, टीसी की मांग

खंडवा| खंडवा के शासकीय उर्दू गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल, परदेशीपुरा में सोमवार को 40 छात्राओं ने उर्दू शिक्षक की नियुक्ति की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। स्कूल में उर्दू शिक्षक की अनुपस्थिति के कारण छात्राओं ने टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) देने की मांग की है ताकि वे अन्य स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर सकें।

 
उर्दू पढ़ाने वाले शिक्षक की कमी:

स्कूल में उर्दू माध्यम की शिक्षा उपलब्ध कराने के बावजूद उर्दू पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं है, जिससे छात्राओं को शिक्षा में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। 

टीसी की मांग: करीब 40 छात्राएं अपने पालकों के साथ टीसी के लिए स्कूल पहुंची। उनका कहना है कि जब तक उर्दू शिक्षक की नियुक्ति नहीं होती, उन्हें टीसी दे दी जाए ताकि वे उर्दू माध्यम की पढ़ाई जारी रख सकें।

पालकों की चिंता: पालकों ने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने कई बार पीटीए (पालक-शिक्षक संघ) की बैठकों में अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि उर्दू माध्यम के स्कूल में गैर-उर्दू भाषी शिक्षकों की नियुक्ति विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हानिकारक हो सकती है।

शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया: स्कूल प्रबंधन ने शिक्षा विभाग (डीईओ) से इस मुद्दे पर चर्चा की है और जल्द ही समाधान का आश्वासन दिया है। पालकों ने जोर देकर कहा कि स्कूल के रिक्त पदों पर उर्दू भाषी शिक्षकों की नियुक्ति प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए।

परीक्षा में भी उर्दू का महत्व:वालकों ने कहा कि स्कूल में तिमाही, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाएं उर्दू भाषा में आयोजित की जाती हैं, लेकिन उर्दू में पढ़ाई की सुविधा नहीं है। उनका मानना है कि उर्दू भाषा में परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को सही शिक्षा नहीं मिल रही है, जिससे उनका भविष्य खतरे में है।

यह विरोध प्रदर्शन स्कूल में उर्दू शिक्षकों की कमी को लेकर प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ था। छात्राओं और उनके पालकों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं होता, तो उन्हें मजबूरी में अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ेगा।