Supreme Court: नासिक में धार्मिक स्थल ध्वस्त करने के नोटिस पर लगाई अंतरिम रोक, Bombay High Court से मांगा स्पष्टीकरण
सुप्रीम कोर्ट ने नासिक में सतपीर बाबा दरगाह को ध्वस्त करने के नगर निगम के नोटिस पर अंतरिम रोक लगाई। बॉम्बे हाईकोर्ट से याचिका सूचीबद्ध न करने की रिपोर्ट मांगी गई। मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी।
नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में एक धार्मिक स्थल को नगर निगम द्वारा ध्वस्त करने के बाद उपजे विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने नासिक नगर निगम द्वारा जारी नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी है और बॉम्बे हाईकोर्ट से इस मामले में याचिका को सूचीबद्ध न करने के संबंध में रिपोर्ट तलब की है।
नासिक के काठे गली क्षेत्र में स्थित सतपीर बाबा दरगाह को नगर निगम ने 15-16 अप्रैल 2025 की रात को अनधिकृत निर्माण बताकर हटा दिया था। इस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। 16 अप्रैल को हुई सुनवाई में जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के 1 अप्रैल 2025 के नोटिस पर रोक लगाने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 21 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान धार्मिक स्थल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नवीन पाहवा ने दावा किया कि 7 अप्रैल को बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद इसे सूचीबद्ध नहीं किया गया। इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह एक गंभीर आरोप है और वकील को अपने बयान की जिम्मेदारी लेनी होगी। कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को याचिका की स्थिति पर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह समझ से परे है कि 9 अप्रैल से अब तक हाईकोर्ट में मामले को सूचीबद्ध क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने नासिक नगर निगम और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से जवाब मांगा है।
नासिक में हुई थी हिंसक झड़प
इससे पहले, नासिक में धार्मिक स्थल को ध्वस्त करने की कार्रवाई के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया, जिसमें 21 पुलिसकर्मी घायल हो गए। भीड़ ने तीन पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस घटना में 15 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
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