रूस से स्पेन तक दिन में छाएगा रात जैसा अंधेरा, अगस्त में 16 दिन के अंतर से दो ग्रहण

रूस से स्पेन तक दिन में छाएगा रात जैसा अंधेरा, अगस्त में 16 दिन के अंतर से दो ग्रहण

12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण, रूस-ग्रीनलैंड-आइसलैंड से स्पेन तक दिखेगा नजारा; 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण, ज्योतिष में प्राकृतिक घटनाओं को लेकर जताई गई आशंका

नई दिल्ली। अगस्त 2026 आसमान में होने वाली दो बड़ी खगोलीय घटनाओं के कारण खास रहने वाला है। इस महीने महज 16 दिनों के अंतराल में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण होने जा रहे हैं। पहला ग्रहण 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जबकि दूसरा 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इतनी कम अवधि में दो ग्रहण पड़ने की वजह से यह खगोलीय घटनाक्रम चर्चा में है।

12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी पूर्णता की पट्टी उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन से होकर गुजरेगी। स्पेन में सूर्यास्त के आसपास पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा। ऐसे समय कुछ इलाकों में दिन के उजाले के बीच कुछ देर के लिए आसमान असामान्य रूप से अंधेरा नजर आएगा।

रूस में दोपहर के समय सूर्य ढकेगा, स्पेन में सूर्यास्त के वक्त दिखेगा नजारा

इस सूर्य ग्रहण की शुरुआत उत्तरी रूस के इलाके से होगी और इसकी छाया आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड तथा आइसलैंड से गुजरते हुए यूरोप की ओर बढ़ेगी। इसके बाद पूर्ण ग्रहण की पट्टी स्पेन तक पहुंचेगी।

NASA के मुताबिक, ग्रहण के दौरान पूर्णता वाले क्षेत्र में चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य को पूरी तरह ढक देगा। अधिकांश स्थानों पर पूर्ण अंधेरा दो मिनट से भी कम समय रहेगा, जबकि पूर्णता की पट्टी के केंद्र के करीब यह अवधि ढाई मिनट से कम होगी।

स्पेन में यह घटना और भी खास होगी, क्योंकि वहां सूर्य क्षितिज के करीब होगा। स्पेन के कुछ हिस्सों में पूर्ण ग्रहण करीब शाम 8:26 बजे स्थानीय समय पर शुरू होने और कुछ मिनट बाद समाप्त होने की जानकारी दी गई है।

27 साल बाद यूरोप की मुख्य भूमि पर दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण यूरोप के लिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है। स्पेन के विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, यह स्पेन के मुख्य भूभाग पर 114 साल में दिखाई देने वाला पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। यूरोप की मुख्य भूमि से पिछली बार पूर्ण सूर्य ग्रहण 1999 में दिखाई दिया था।

स्पेन के कई शहरों से इस खगोलीय घटना को देखने की तैयारी की गई है। हालांकि पूर्ण ग्रहण हर जगह दिखाई नहीं देगा। कई देशों और इलाकों में लोग केवल आंशिक सूर्य ग्रहण ही देख सकेंगे।

28 अगस्त को दूसरा ग्रहण, इस बार चंद्रमा पर पड़ेगी पृथ्वी की छाया

पहले ग्रहण के करीब 16 दिन बाद 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इस दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाएगी और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ेगी।

इस ग्रहण में चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी umbra में प्रवेश करेगा। उपलब्ध खगोलीय गणनाओं के मुताबिक करीब 93 से 96 प्रतिशत तक चंद्रमा का व्यास गहरी छाया में आ सकता है, हालांकि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं होगा।

भारत में दोनों ग्रहण दिखाई देंगे या नहीं?

इस पूरे घटनाक्रम की भारत के लिए सबसे अहम बात यह है कि 12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी तरह 28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण भी भारत से दिखाई नहीं देने की जानकारी दी गई है। इसलिए भारत में इन ग्रहणों को लेकर सामान्य खगोलीय अवलोकन का अवसर नहीं मिलेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का सूतक उस स्थान पर माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि अगस्त के ये दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए कई ज्योतिषीय स्रोत भारत में इनके सूतक को मान्य नहीं मानते हैं।

ज्योतिष में 15-16 दिन के अंतर से दो ग्रहण को लेकर क्या मान्यता है?

ज्योतिषीय परंपरा में एक ही ग्रहण काल के दौरान सूर्य और चंद्र ग्रहण का कम अंतराल में पड़ना महत्वपूर्ण माना जाता है। कुछ ज्योतिषीय विश्लेषणों में दावा किया गया है कि ऐसे समय में प्राकृतिक घटनाओं, मौसम में बदलाव और सामाजिक परिस्थितियों में अस्थिरता के संकेत देखे जाते हैं।

कुछ ज्योतिषीय स्रोत तेज आंधी-तूफान, भूकंप और अन्य प्राकृतिक घटनाओं की आशंका जैसी बातें भी बताते हैं। इन दावों का आधार ज्योतिषीय ग्रंथों और पारंपरिक मान्यताओं को बताया जाता है।

हालांकि यहां यह साफ करना जरूरी है कि ग्रहण और भूकंप, तूफान या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के बीच कोई वैज्ञानिक कारण-परिणाम संबंध स्थापित नहीं है। इसलिए प्राकृतिक प्रकोप की आशंका को वैज्ञानिक भविष्यवाणी के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।

वैज्ञानिकों के लिए यह क्यों खास है?

वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य की रोशनी को कुछ समय के लिए रोक देता है। पूर्ण ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य की चमकीली सतह को पूरी तरह ढक देता है और सूर्य का कोरोना दिखाई दे सकता है।

12 अगस्त का ग्रहण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी पूर्णता की पट्टी अपेक्षाकृत बड़े और आबादी वाले यूरोपीय क्षेत्र तक पहुंचेगी। ESA ने भी इसे महत्वपूर्ण खगोलीय घटना बताते हुए यूरोप में इसके अवलोकन और वैज्ञानिक गतिविधियों की तैयारी की है।

ग्रहण देखने वालों के लिए जरूरी सावधानी

सूर्य ग्रहण को देखने के दौरान सीधे सूर्य की ओर देखना आंखों के लिए गंभीर नुकसानदायक हो सकता है। आंशिक ग्रहण के दौरान भी सामान्य धूप का चश्मा पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता। वैज्ञानिक संस्थाएं प्रमाणित सोलर-व्यूइंग ग्लास या उपयुक्त सौर फिल्टर इस्तेमाल करने की सलाह देती हैं।

अगस्त में होने वाले ये दोनों ग्रहण वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाक्रम हैं, जबकि ज्योतिषीय परंपराओं में इनके अलग-अलग अर्थ और प्रभाव बताए जाते हैं। ऐसे में “प्राकृतिक प्रकोप की आशंका” को ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए, वैज्ञानिक चेतावनी के रूप में नहीं।