151 किमी की बोल बम यात्रा पर निकले 16 बैगा आदिवासी, भोरमदेव मंदिर में करेंगे जलाभिषेक

151 किमी की बोल बम यात्रा पर निकले 16 बैगा आदिवासी, भोरमदेव मंदिर में करेंगे जलाभिषेक

मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़। मध्य प्रदेश के 16 बैगा आदिवासियों के 151 किलोमीटर लंबी बोल बम कांवड़ यात्रा में शामिल होने का दावा सामने आया है। बताया जा रहा है कि ये सभी कांवड़िए छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर की ओर रवाना हुए हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं और भोरमदेव पहुंचकर जलाभिषेक करने की तैयारी में हैं।

इस यात्रा को लेकर सामने आए संदेश में इसे आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर देखा गया है। पोस्ट में दावा किया गया है कि ये 16 बैगा आदिवासी हाल ही में अपने मूल धार्मिक विश्वास में लौटे हैं और अब सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक आयोजन में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं।

 151 किलोमीटर की धार्मिक यात्रा

बताया गया है कि बैगा आदिवासियों का यह समूह करीब 151 किलोमीटर की दूरी तय कर भोरमदेव मंदिर पहुंचेगा। बोल बम यात्रा में कांवड़िए धार्मिक आस्था के साथ पैदल यात्रा करते हैं और निर्धारित मंदिर में भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं।

यात्रा के दौरान ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे गूंजते हैं। सावन के महीने में देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी कांवड़ यात्राएं आयोजित की जाती हैं।

बैगा जनजाति कौन है?

बैगा मध्य भारत की प्रमुख आदिवासी जनजातियों में शामिल हैं। इनकी आबादी मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है। बैगा समुदाय की अपनी पारंपरिक जीवनशैली, रीति-रिवाज और प्रकृति से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराएं हैं।

इसी वजह से इस यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन के तौर पर नहीं, बल्कि आदिवासी परंपरा और धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषय के रूप में भी देखा जा रहा है।

 सनातन संस्कृति से जोड़ने का दावा

सोशल मीडिया पर वायरल संदेश में कहा गया है कि “आदिवासी सनातन संस्कृति का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं।” पोस्ट में बैगा आदिवासियों की कांवड़ यात्रा को उनकी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए इसे सनातन परंपरा से जुड़ाव का उदाहरण बताया गया है।

हालांकि, “मूल धर्म में लौटने” और 16 बैगा आदिवासियों की संख्या से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इन बातों को खबर में दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

भोरमदेव मंदिर का महत्व

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध मंदिर है। मंदिर की स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक महत्व के कारण इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों में गिना जाता है।

ऐसे में 151 किलोमीटर की यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ आदिवासी समुदाय की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को लेकर भी चर्चा में है।

खबर की मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के 16 बैगा आदिवासियों के कांवड़ यात्रा में शामिल होने का दावा।
करीब 151 किलोमीटर की दूरी तय करने की बात।
यात्रा का गंतव्य भोरमदेव मंदिर, छत्तीसगढ़ बताया गया है।
सावन में भगवान शिव की भक्ति के साथ बोल बम कांवड़ यात्रा।
सोशल मीडिया पोस्ट में यात्रा को आस्था, विरासत और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा गया।
पोस्ट में बैगा आदिवासियों को सनातन संस्कृति से जोड़ने का दावा किया गया है।
16 लोगों और “मूल धर्म में वापसी” के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।