ई-कचरे पर सरकारी सुस्ती से NGT नाराज, भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर से मांगा जवाब

ई-कचरे पर सरकारी सुस्ती से NGT नाराज, भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर से मांगा जवाब

अवैध तरीके से ई-कचरा जमा करने और खुले में जलाने के आरोपों पर सख्त हुआ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, पांच सदस्यीय समिति करेगी जमीनी जांच; 1 अक्टूबर को अगली सुनवाई

भोपाल। मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ रहे ई-कचरे (E-Waste) के उचित निपटारे को लेकर बरती जा रही कथित लापरवाही पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ई-कचरे के अवैध संग्रहण, खुले में जलाने और इससे पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान के मामले में NGT ने भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकरण ने प्रदेश में ई-कचरा प्रबंधन की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति को संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण कर ई-कचरे के संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निपटारे तक की व्यवस्था की जांच करनी होगी। समिति को चार सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक और कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

याचिका में ई-कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना की ओर से दायर याचिका के बाद सामने आया है। याचिका में मध्य प्रदेश में बढ़ते ई-कचरे और उसके वैज्ञानिक तरीके से निपटारे की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि प्रदेश में पैदा होने वाला बड़ी मात्रा में ई-कचरा अधिकृत रीसाइक्लिंग या प्रोसेसिंग केंद्रों तक पहुंचने के बजाय अनधिकृत कबाड़ियों और असंगठित क्षेत्र में पहुंच रहा है।

आरोप है कि इन जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तोड़ने, अलग-अलग हिस्से निकालने और ई-कचरे को खुले में जलाने जैसी गतिविधियां की जाती हैं। इससे पर्यावरण में प्रदूषक तत्व फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

छह साल में कई गुना बढ़ा ई-कचरा

याचिका में प्रस्तुत आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश में ई-कचरे की मात्रा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है।

बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2019 में करीब 500 मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न होने का अनुमान था, जो बढ़कर लगभग 5 हजार मीट्रिक टन सालाना तक पहुंच गया है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि प्रदेश में पैदा होने वाले कुल ई-कचरे का केवल लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा ही वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है।

ई-कचरा उत्पादन के मामले में इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन जैसे शहरों का प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया है। याचिका में भोपाल में हर साल करीब 415 मीट्रिक टन ई-कचरा पैदा होने का आंकड़ा भी रखा गया है।

ई-कचरा खुले में जलाने से पर्यावरण को खतरा

ई-कचरे में कई ऐसे पदार्थ और भारी धातुएं मौजूद हो सकती हैं, जो गलत तरीके से निपटाए जाने पर पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। इनमें सीसा, पारा, कैडमियम, क्रोमियम और आर्सेनिक जैसी धातुओं का उल्लेख किया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक कचरे को खुले में जलाने पर जहरीला धुआं और अन्य प्रदूषक तत्व वातावरण में फैल सकते हैं। वहीं, ई-कचरे को बिना वैज्ञानिक प्रक्रिया के जमीन में दबाने या खुले में फेंकने से मिट्टी और भूजल के प्रदूषित होने का खतरा भी रहता है।

याचिका में असंगठित क्षेत्र में ई-कचरे के निपटारे को लेकर बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों के स्वास्थ्य पर भी चिंता जताई गई है।

NGT ने गठित की पांच सदस्यीय समिति

मामले की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए NGT ने पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में विभिन्न संबंधित विभागों और विशेषज्ञ संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।

समिति में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय का प्रतिनिधि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नामित विशेषज्ञ, मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रतिनिधि तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव शामिल हैं।

समिति को किन बिंदुओं की करनी होगी जांच?

NGT द्वारा गठित समिति को मौके पर जाकर ई-कचरा प्रबंधन की जमीनी स्थिति का निरीक्षण करना होगा। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि:

शहरों में ई-कचरे का संग्रहण किस तरह किया जा रहा है।
ई-कचरा अधिकृत केंद्रों तक पहुंच रहा है या नहीं।
ई-कचरे के परिवहन की व्यवस्था कैसी है।
रीसाइक्लिंग और प्रोसेसिंग के लिए कौन से अधिकृत केंद्र काम कर रहे हैं।
अनधिकृत कबाड़ियों द्वारा ई-कचरे के संग्रहण और निपटारे की स्थिति क्या है।
ई-कचरे को खुले में जलाने या अवैज्ञानिक तरीके से निपटाने पर क्या कार्रवाई की गई।
संबंधित विभागों ने पर्यावरणीय नियमों के पालन के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं।

समिति को निरीक्षण और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर से मांगा जवाब

NGT ने इस मामले में भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर समेत राज्य सरकार, पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों से भी जवाब मांगा है।

अधिकरण यह जानना चाहता है कि ई-कचरा प्रबंधन से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही अनधिकृत तरीके से ई-कचरा इकट्ठा करने, उसे जलाने या खुले में फेंकने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए क्या कार्रवाई की गई, इसका भी विवरण मांगा गया है।

प्रशासन के सामने बढ़ी जिम्मेदारी

NGT की सख्ती के बाद अब संबंधित विभागों के सामने ई-कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर ठोस जवाब देने की चुनौती है। खास तौर पर भोपाल में ई-कचरे के संग्रहण और निपटारे की व्यवस्था की जमीनी स्थिति समिति की जांच के बाद सामने आ सकती है।

अगर जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन या अनधिकृत तरीके से ई-कचरे के निपटारे के मामले सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट हो सकती है।

1 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

इस मामले में अब 1 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई होगी। इससे पहले पांच सदस्यीय समिति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। समिति की रिपोर्ट में ई-कचरे के उत्पादन, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटारे की वास्तविक स्थिति के साथ-साथ नियमों के पालन और प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई का ब्योरा सामने आने की उम्मीद है।

फिलहाल NGT की कार्रवाई के बाद भोपाल समेत प्रदेश में ई-कचरा प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल और अधिक गंभीर हो गए हैं। अब अगली सुनवाई में समिति की रिपोर्ट और संबंधित विभागों के जवाब पर सबकी नजर रहेगी।