भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों की जांच पूरी, 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश; जिम्मेदारी पर क्या आया सामने?

भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों की जांच पूरी, 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश; जिम्मेदारी पर क्या आया सामने?

36 से ज्यादा मौतों के बाद बनी थी Judicial Commission, हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश होने के बाद उसे सार्वजनिक करने की मांग; कोर्ट ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने से किया इनकार

इंदौर। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई 36 से अधिक लोगों की मौतों के मामले में जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष पेश कर दी है। इस मामले की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय न्यायिक आयोग ने 600 से अधिक पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है।

रिपोर्ट में इस पूरे घटनाक्रम के कारणों और परिस्थितियों का विस्तार से उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की गई, लेकिन हाईकोर्ट ने फिलहाल जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद अब नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक पक्ष को मामले में अपना जवाब कोर्ट के समक्ष पेश करना होगा।

दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में सामने आया था मामला

भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच दूषित पानी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बाद बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। इस घटनाक्रम के दौरान 36 से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई थी।

मामले ने उस समय पूरे प्रदेश में चिंता पैदा कर दी थी। दूषित पानी की आपूर्ति, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और स्थानीय प्रशासन की भूमिका को लेकर कई सवाल उठे थे।

घटना के बाद मामले की न्यायिक जांच की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में कई याचिकाएं दायर की गईं।

27 जनवरी को गठित हुआ था जांच आयोग

मामले की गंभीरता को देखते हुए 27 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था।

इस आयोग की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता को सौंपी गई थी। आयोग का उद्देश्य भागीरथपुरा में हुए घटनाक्रम की परिस्थितियों और कारणों की जांच करना था।

आयोग ने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की और उसे हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिया।

600 से ज्यादा पन्नों में दर्ज है जांच का विवरण

जांच आयोग की रिपोर्ट 600 से अधिक पन्नों की बताई जा रही है। रिपोर्ट में घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं और उन परिस्थितियों का विस्तृत विवरण शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिनके कारण भागीरथपुरा में यह गंभीर स्थिति पैदा हुई।

रिपोर्ट कोर्ट में पेश होने के बाद अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजर है। हालांकि, रिपोर्ट की पूरी सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए उसके निष्कर्षों के सभी बिंदुओं को फिलहाल सार्वजनिक तौर पर विस्तार से नहीं बताया जा सकता।

रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग क्यों उठी?

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और अन्य पक्षों की ओर से जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग रखी गई। याचिकाकर्ता पक्ष का तर्क था कि भागीरथपुरा में बड़ी संख्या में हुई मौतों के मामले में लोगों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि जांच आयोग ने घटना के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर क्या निष्कर्ष दिए हैं।

याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता अजय बगड़िया ने भी कोर्ट के सामने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से जुड़े तर्क रखे।

हालांकि, सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता की ओर से रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग का विरोध किया गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी फिलहाल रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया।

अब नगर निगम को देना होगा जवाब

जांच आयोग की रिपोर्ट कोर्ट में पेश होने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में नगर निगम को अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

अब निगम और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोर्ट के सामने यह स्पष्ट किया जाना है कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से जुड़े घटनाक्रम के दौरान क्या स्थिति थी, प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए गए और जांच आयोग की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों पर उनका क्या पक्ष है।

यानी जांच रिपोर्ट कोर्ट में जमा होने के बाद अब मामले की अगली प्रक्रिया में संबंधित सरकारी एजेंसियों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

जिम्मेदारी को लेकर बढ़ी उत्सुकता

भागीरथपुरा मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने और मौतों के पीछे आखिर जिम्मेदारी किसकी थी और व्यवस्था में कहां चूक हुई।

600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में घटनाक्रम के कारणों का विस्तृत उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में रिपोर्ट के निष्कर्षों को लेकर लोगों और याचिकाकर्ताओं में भी उत्सुकता है।

हालांकि, चूंकि हाईकोर्ट ने फिलहाल रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है, इसलिए यह स्पष्ट रूप से कहना संभव नहीं है कि आयोग ने किस अधिकारी, विभाग या संस्था को किस स्तर तक जिम्मेदार माना है। इस संबंध में अंतिम स्थिति रिपोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया और कोर्ट के आगामी आदेशों से स्पष्ट होगी।

हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजर

भागीरथपुरा में हुई मौतों के मामले में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट कोर्ट में पेश होने के बाद अब मामला एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। एक ओर 600 से ज्यादा पन्नों की जांच रिपोर्ट अदालत के रिकॉर्ड में आ चुकी है, वहीं दूसरी ओर उसे सार्वजनिक करने की मांग फिलहाल स्वीकार नहीं हुई है।

अब नगर निगम और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद हाईकोर्ट मामले में आगे की सुनवाई करेगा। कोर्ट की आगामी कार्यवाही से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर किस तरह की जवाबदेही तय होती है।

फिलहाल भागीरथपुरा मामले में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने के कारण उसके पूरे निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। ऐसे में किसे जिम्मेदार ठहराया गया है, यह दावा आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट सार्वजनिक या कोर्ट के आदेश में स्पष्ट होने के बाद ही किया जा सकेगा।