मां से बिछड़े 5 ओरंगुटान बच्चे हुए उदास, तनाव कम करने के लिए सुनाया जा रहा क्लासिकल म्यूजिक
ओडिशा के जंगल से रेस्क्यू किए गए दुर्लभ शिशु नंदनकानन जू में सुरक्षित, विशेषज्ञ कर रहे व्यवहार और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी; तस्करी की जांच भी तेज
जंगल से रेस्क्यू के बाद नंदनकानन लाए गए ओरंगुटान
ओडिशा के बालासोर वन क्षेत्र से रेस्क्यू किए गए पांच दुर्लभ शिशु ओरंगुटान को अब भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में रखा गया है। जंगल से बरामदगी के बाद इन सभी को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेषज्ञों की निगरानी में उनकी दिनचर्या, भोजन और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक मां से अलग होने के बाद कुछ समय में उनके व्यवहार में उदासी और तनाव जैसे बदलाव देखे गए हैं।
तनाव कम करने के लिए दी जा रही म्यूजिक थेरेपी
ओरंगुटान बच्चों के तनाव को कम करने और उन्हें शांत रखने के लिए नंदनकानन में म्यूजिक थेरेपी का सहारा लिया जा रहा है। खासतौर पर उन्हें शास्त्रीय संगीत सुनाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सभी ओरंगुटानों के व्यवहार पर नजर रखी जा रही है और एथोलॉजिस्ट यानी पशु व्यवहार विशेषज्ञ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भी उनकी स्थिति का आकलन कर रहे हैं। उद्देश्य यह है कि रेस्क्यू के बाद बदले वातावरण में उन्हें मानसिक रूप से सहज रखा जा सके।
मां से अलग होने का असर व्यवहार में नजर आया
जानकारी के अनुसार, पांचों ओरंगुटान अलग-अलग समय पर अपनी मां से बिछड़ने के कारण उदास दिखाई देते हैं। इसी वजह से उनके लिए ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जिसमें वे व्यस्त रहें और प्राकृतिक व्यवहार के करीब रह सकें। उनके रहने की जगह पर लटकने के लिए कपड़े के बैग और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सभी को एक साथ रखने की कोशिश की जा रही है, जिससे वे समूह में रहकर खेल सकें और एक-दूसरे के साथ समय बिता सकें।
हर दो घंटे में खाना, नींद और दिनचर्या पर नजर
नंदनकानन जू में इन ओरंगुटानों की भोजन व्यवस्था भी विशेष तरीके से की जा रही है। उन्हें करीब हर दो घंटे में खाना दिया जा रहा है। दिन के समय पांचों एक साथ खाते, खेलते और आराम करते हैं। रात में भी उनकी निगरानी जारी रहती है। जानकारी के मुताबिक रात के दौरान दो ओरंगुटान एक साथ रहते हैं, जबकि बाकी तीन अलग-अलग सोते हैं। उनकी गतिविधियों और व्यवहार में होने वाले बदलावों को लगातार रिकॉर्ड किया जा रहा है।
कमरे में एसी और ताजी हवा की व्यवस्था
ओरंगुटानों को उनके अनुकूल वातावरण देने के लिए रहने वाले कमरे में एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों के अनुसार, तापमान को नियंत्रित रखने के साथ सुबह के समय कमरे की खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दी जाती है। बुधवार को इनमें से एक ओरंगुटान को बुखार आया था, लेकिन बाद में उसका तापमान कम होने की जानकारी दी गई। बाकी सभी की स्वास्थ्य स्थिति पर भी विशेषज्ञों की निगरानी बनी हुई है।
तनाव कम होने के बाद लिए जाएंगे सैंपल
ओरंगुटानों की मौजूदा मानसिक और शारीरिक स्थिति को देखते हुए उनके सैंपल लेने की प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, तनाव कम होने के बाद करीब 10 दिन के अंतराल पर सैंपल लिए जाने की योजना है। नंदनकानन के डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप मिरासे के मुताबिक विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। सैंपल और अन्य जांच से उनकी स्वास्थ्य स्थिति तथा आगे की देखभाल को लेकर जरूरी जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी।
डीएनए जांच से खुलेगा ओरंगुटानों की तस्करी का राज
इन ओरंगुटानों के भारत में पाए जाने को लेकर भी गंभीर सवाल हैं, क्योंकि ओरंगुटान प्राकृतिक रूप से भारत में नहीं पाए जाते। ये मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के जंगलों में पाए जाने वाले वन्यजीव हैं। इसलिए इनके भारत तक पहुंचने और बालासोर क्षेत्र में मिलने की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद इनकी उत्पत्ति और आपसी संबंधों से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई की तैयारी
ओडिशा के वन मंत्री गणेश राम खुंटिया के अनुसार, ओरंगुटानों की कथित तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को पत्र भेजा गया है। इस मामले की जांच में पुलिस, प्रशासन, वन विभाग, स्पेशल टास्क फोर्स और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं। जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस और वहां के स्थानीय प्रशासन से भी सहयोग लिया जाएगा, क्योंकि वन्यजीवों की तस्करी से जुड़े मामलों में राज्यों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
अब सबसे बड़ी चुनौती इनकी सुरक्षित देखभाल
फिलहाल नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में इन पांचों ओरंगुटानों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञ उनके व्यवहार, भोजन, तापमान और स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रख रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये दुर्लभ वन्यजीव भारत तक कैसे पहुंचे और इनके पीछे कौन लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में डीएनए रिपोर्ट और जांच की प्रगति से इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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news desk MPcg