पीएम मोदी का विजन है देश में सुशासन बनाए रखना : बीवीआर सुब्रमण्यम
पीएम मोदी का विजन है देश में सुशासन बनाए रखना : बीवीआर सुब्रमण्यम
नई दिल्ली। सुशासन महोत्सव के दूसरे दिन नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने भारत सरकार के आगामी दस सालों के विजन का उजागर किया। उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों में हमारे देश में हर क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं, और अब हमें दुनिया के पटल पर भारत की उपस्थिति प्रमुख देश के रूप में दिखानी है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी की यही सोच है कि कमिटमेंट प्रमुख है। और इसी से सुशासन आता है।
बीवीआर सुब्रमण्यम ने इंटरव्यू सत्र में बताया कि योजना आयोग 1950 में बना था और यह समाजवादी व्यवस्था की देन था। पांच सालों की योजना समाजवादी देशों में होती थी। लेकिन जब रूस और चीन में उसे बंद कर दिया गया तो भारत में उसे क्यों बयाने रखा गया। इसके बारे में सवाल उठाया। जिस वक्त जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई गई। उस वक्त पूरे राज्य में सुशासन को बनाये रखने में उनका अहम योगदान माना जाता है। इंटरव्यू सेशन में नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने भारत सरकार के आगामी दस सालों के विजन को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज हमारा देश पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। पिछले दस साल के दौरान देश के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आये हैं। इस साल के अंत तक हर घर तक पानी, बिजली की पहुंच हो जायेगी।
सुशासन की चुनौतियां क्या हैं?
बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि केवल आइडिया और प्लानिंग की बजाय क्रियान्वयन, नेतृत्व करने वाले को विषय का ज्ञान, लाभ और नुकसान का आकलन करना चाहिए। साथ में काम करने वाले की क्षमता का मूल्यांकन और निचले स्तर को भी लीडरशिप के लिए मौका देना चाहिए। इससे सुशासन में बेहतरी हो सकती है।
शहरों की इकोनोमिक प्लानिंग जरूरी
बीवीआर सुब्रमण्यम ने शहरों की अर्बन प्लानिंग के साथ-साथ उनकी इकोनोमिक प्लानिंग की भी जरूरत को उजागर किया। वे मुंबई, सूरत, वाराणसी जैसे शहरों की इकोनोमिक प्लानिंग के लिए योजना बना रहे हैं, और अभी तक चार शहरों की प्लानिंग की है। इसके साथ ही, उन्होंने विकास और सुशासन के लिए शहरों की खूबियों और प्रकृति को देखने की भी बात की। जैसे कि वाराणसी और प्रयागराज की प्लानिंग कर रहे हैं। उनके मुताबिक शहरों की इकोनोमिक गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी है और स्थानीय मिजाज के मुताबिक उनका विकास करना चाहिए। क्योंकि हम अक्सर शहरों की मास्टरप्लानिंग करते हैं, या वहां इंस्फ्राक्चर बनाते हैं लेकिन वहां इकोनोमिक डेवलेपमेंट नहीं करते।
साल 2014 के बाद व्यवस्था लचीली हुई
2014 में प्रधानमंत्री बनते ही मोदी जी ने योजना आयोग को नीति आयोग में बदला। उन्होंने प्लानिंग का काम वित्त विभाग को सौंप दिया। जिससे उन्हें काम करने की आजादी मिली। नई व्यवस्था ने लचीलापन लाया जिससे लोगों को दरबार नही लगाना पड़ता। नीति आयोग के सीईओ ने बताया कि मोदी सरकार का फोकस विजन बनाने और देश को आगे बढ़ाने पर है। इसके साथ ही उनकी सभी योजनाएं देशवासियों तक पहुंचाने के लिए हैं।
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