संभल हिंसा: 'मैं सांसद हूं, जांच में मदद करूंगा', जियाउर्रहमान बर्क थाने पहुंचे, SIT के सवालों का देंगे जवाब

संभल हिंसा मामला: सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क SIT के सामने पेश, जांच में सहयोग का वादा संभल में 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क 8 अप्रैल 2025 को नखासा थाने पहुंचे और SIT के सामने पेश हुए। खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने कानून में भरोसा जताते हुए जांच में सहयोग की बात कही। हिंसा में 5 लोगों की मौत और कई पुलिसकर्मियों के घायल होने के बाद बर्क पर भीड़ को उकसाने का आरोप है। SIT ने उन्हें दिल्ली में समन भेजा था। पुलिस ने अब तक 81 लोगों को गिरफ्तार किया है और बर्क से पूछताछ में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई है, लेकिन जांच में सहयोग अनिवार्य है। इस घटना ने राजनीतिक हलचल मचा दी है, और परिणाम पर सबकी नजर है।

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संभल हिंसा मामला: सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने SIT के सामने किया सरेंडर, जांच में सहयोग का वादा
संभल, 08 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पिछले साल 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क मंगलवार को नखासा थाने पहुंचे। विशेष जांच टीम (SIT) के सामने पेश होने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया। खराब स्वास्थ्य के बावजूद बर्क ने कानून और संविधान में पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि वह जांच में हर संभव सहयोग करेंगे। SIT ने उन्हें इससे पहले दिल्ली स्थित उनके आवास पर समन भेजा था, जिसके बाद आज उनकी पेशी हुई।
हिंसा मामले में बढ़ती जांच का दायरा
संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा में पांच लोगों की मौत हुई थी और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने सांसद बर्क सहित कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। आरोप है कि बर्क ने अपने भाषण से भीड़ को उकसाया, जिसके कारण हिंसा भड़की। इस मामले में जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। जफर अली ने पूछताछ में कथित तौर पर बर्क के खिलाफ बयान दिया है, जिसके बाद सांसद पर शिकंजा और कस गया है।
SIT ने बर्क को पूछताछ के लिए 8 अप्रैल को तलब किया था। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम हिंसा से पहले और बाद में बर्क की भूमिका, उनके बयानों और संभावित संलिप्तता की गहराई से पड़ताल कर रही है। पुलिस ने अब तक इस मामले में 81 लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
बर्क का बयान: "न्यायपालिका पर भरोसा"
नखासा थाने पहुंचने से पहले बर्क ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मुझे न्यायपालिका और संविधान पर पूरा भरोसा है। एक सांसद और नागरिक के तौर पर मेरा कर्तव्य है कि मैं जांच में सहयोग करूं। मेरी तबीयत ठीक नहीं है, लेकिन फिर भी मैं यहां मौजूद हूं।" उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और वह हिंसा के दौरान संभल में मौजूद नहीं थे। बर्क ने कहा, "मैं उस समय बेंगलुरु में था। मेरे खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।"
हालांकि, संभल पुलिस का कहना है कि हिंसा से कुछ दिन पहले बर्क ने मस्जिद में भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके सबूत उनके पास मौजूद हैं। इस दावे को लेकर SIT आज उनसे गहन पूछताछ कर सकती है।
कोर्ट और प्रशासन का रुख
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस साल जनवरी में बर्क की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी, लेकिन उनकी FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने साफ कहा था कि बर्क को जांच में सहयोग करना होगा। इसके बाद से ही पुलिस और SIT सक्रिय रूप से इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, बर्क के मकान के अवैध निर्माण और बिजली चोरी के आरोपों में भी प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
राजनीतिक हलचल और जनता की नजर
बर्क की SIT के सामने पेशी को लेकर संभल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। थाने के आसपास भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात की गई है। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। सपा समर्थक इसे "राजनीतिक प्रतिशोध" बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे कानून का पालन करार दे रहे हैं।
आज की पूछताछ के नतीजे इस मामले में एक अहम मोड़ साबित हो सकते हैं। अगर SIT को बर्क की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल, संभल की जनता और राजनीतिक गलियारे इस जांच के परिणाम पर टकटकी लगाए हुए हैं।