इंदौर | भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को बस्ती में दो लोगों की मौत हो गई। इनमें दो साल की बच्ची रिया भी शामिल है। इसके अलावा 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर की भी जान चली गई। उन्हें सात दिन पहले उल्टी दस्त की शिकायत के चलते निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था।

इंदौर | भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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 मंगलवार को क्षेत्र में दो और लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो साल की मासूम बच्ची रिया प्रजापति और 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर शामिल हैं। परिजनों का आरोप है कि दोनों की तबीयत दूषित पानी के कारण बिगड़ी, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अभी इन मौतों को सीधे तौर पर डायरिया से जोड़ने की पुष्टि नहीं की है।

परिजनों के अनुसार, शालिग्राम ठाकुर को सात दिन पहले उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें पहले से लकवे की समस्या थी, लेकिन अन्य कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उनकी मौत हो गई।

वहीं, दो वर्षीय रिया प्रजापति को दिसंबर में उल्टी-दस्त की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डिस्चार्ज के बाद उसकी हालत लगातार कमजोर होती चली गई। 15 दिन पहले उसे चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लिवर की समस्या सामने आई। बाद में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान बच्ची ने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि दूषित पानी के कारण संक्रमण बढ़ा और इसका असर लिवर तक पहुंचा।

अब तक भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण 35 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें से 16 मौतों को कोर्ट ने डायरिया से जुड़ा माना है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर एक जांच आयोग का गठन किया गया है। आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता कर रहे हैं।

आयोग ने जांच शुरू कर दी है और प्रभावित लोगों से शिकायत, मेडिकल रिकॉर्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र, जल प्रदूषण से जुड़े फोटो-वीडियो और अन्य दस्तावेज 28 फरवरी तक जमा करने की अपील की है। आयोग दूषित जल के कारण, प्रशासनिक लापरवाही, जनहानि और भविष्य में सुधारात्मक उपायों की जांच करेगा।