साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त: भारत-अमेरिका संयुक्त कार्रवाई में अवैध कॉल सेंटर का पर्दाफाश

साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त: भारत-अमेरिका संयुक्त कार्रवाई में अवैध कॉल सेंटर का पर्दाफाश

एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियान में FBI और भारतीय साइबर अपराध इकाइयों ने मिलकर भारत से संचालित हो रहे एक अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह नेटवर्क लंबे समय से अमेरिकी नागरिकों, खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी कर रहा था। फर्जी टेक सपोर्ट और सरकारी अधिकारी बनकर ठगी

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह:

नकली तकनीकी सहायता कॉल करता था खुद को सरकारी एजेंसी या टेक कंपनी का अधिकारी बताता था लोगों के कंप्यूटर में “सिक्योरिटी इश्यू” या वायरस का डर दिखाता था

इसके बाद पीड़ितों को एक टोल-फ्री नंबर पर कॉल करने के लिए मजबूर किया जाता था, जो सीधे इस फर्जी कॉल सेंटर से जुड़ा होता था। रिमोट एक्सेस लेकर की जाती थी ठगी

कॉल के दौरान:

पीड़ित के कंप्यूटर को रिमोट एक्सेस लिया जाता था सामान्य सिस्टम टूल्स को “एडवांस रिपेयर” बताकर दिखाया जाता था फिर उनसे नकली सर्विस या मरम्मत के नाम पर पैसे वसूले जाते थे

भुगतान के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था, 

वायर ट्रांसफर गिफ्ट कार्ड नकद भुगतान 2016 से 2022 तक चला नेटवर्क अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार यह पूरा नेटवर्क: 2016 से 2022 तक सक्रिय रहा हजारों अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया गया खासकर बुजुर्ग लोगों से लाखों डॉलर की ठगी की गई जांच में कई खुलासे

अधिकारियों की जांच में यह भी सामने आया कि:

कुछ टेलीकॉम अधिकारियों ने इस नेटवर्क को सपोर्ट किया कॉल रूटिंग और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं कई ऑपरेटरों और पूर्व कर्मचारियों ने अपराध स्वीकार किया है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त कार्रवाई

FBI के बोस्टन डिवीजन और भारतीय एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई के बाद:

कई आरोपियों पर कार्रवाई की गई कॉल सेंटर नेटवर्क को ध्वस्त किया गया मामले की आगे जांच जारी है यह मामला अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को दर्शाता है। तकनीक का गलत इस्तेमाल कर बनाए गए ऐसे नेटवर्क न केवल विदेशी नागरिकों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि देश की साइबर छवि पर भी असर डालते हैं।