हरिद्वार में कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, बोले- प्रयागराज महाकुंभ से सीख ले उत्तराखंड सरकार

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, बोले- प्रयागराज महाकुंभ से सीख ले उत्तराखंड सरकार

हरिद्वार, 12 अगस्त 2026। हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान साफ-सफाई और सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस बीच एक बयान में उत्तराखंड सरकार से प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं से सीख लेने की अपील की गई है। बयान में कहा गया कि करोड़ों कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने को देखते हुए प्रशासन को पहले से पर्याप्त मोबाइल टॉयलेट और सफाई व्यवस्था करनी चाहिए थी।

बयान में प्रयागराज महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां करीब 65 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद बड़े स्तर पर स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की गई थी। अलग-अलग स्नान घाटों के आसपास बड़ी संख्या में मोबाइल टॉयलेट लगाए गए थे और उनकी सफाई के लिए बड़ी संख्या में सफाईकर्मी तैनात किए गए थे।

महाकुंभ की सफाई व्यवस्था का दिया उदाहरण

बयान में दावा किया गया कि प्रयागराज महाकुंभ में सफाई व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने बड़े पैमाने पर तैयारी की थी। स्नान घाटों के आसपास मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था की गई और सफाईकर्मियों की टीमें लगातार काम करती रहीं।

बयान देने वाले ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद महाकुंभ से इस तरह की गंदगी से जुड़े वीडियो सामने नहीं आए। इसी व्यवस्था को उदाहरण बनाते हुए उत्तराखंड सरकार से हरिद्वार में भी इसी तरह की तैयारी करने की बात कही गई।

कांवड़ियों को दोष देने से पहले सुविधाएं देने की जरूरत

बयान में कांवड़ियों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही गई। इसमें कहा गया कि करोड़ों कांवड़िए जब हरिद्वार पहुंचते हैं तो उन्हें भी शौचालय की जरूरत होती है। ऐसे में यदि पर्याप्त सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध नहीं होंगे, तो इतनी बड़ी भीड़ के बीच स्वच्छता बनाए रखना चुनौती बन सकता है।

बयान में कहा गया कि कांवड़ियों को गंदगी के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय प्रशासन को यह देखना चाहिए कि श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।

हर की पैड़ी पर सबसे ज्यादा मोबाइल टॉयलेट लगाने की बात

बयान में हर की पैड़ी का विशेष रूप से जिक्र किया गया। कहा गया कि हरिद्वार में सबसे ज्यादा भीड़ इसी क्षेत्र के आसपास रहती है, इसलिए यहां सबसे अधिक संख्या में मोबाइल टॉयलेट उपलब्ध होने चाहिए थे।

तर्क दिया गया कि अगर भीड़ वाले क्षेत्रों में पर्याप्त शौचालय उपलब्ध होते, तो श्रद्धालुओं को खुले में शौच या अन्य अस्वच्छ तरीकों का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ती।

पानी की बोतलों में पेशाब भरने के दावे पर भी चर्चा

बयान में यह भी कहा गया कि पर्याप्त शौचालय नहीं होने की वजह से कुछ कांवड़ियों द्वारा पानी की बोतलों में पेशाब भरकर रखने जैसी स्थिति सामने आई। बयान देने वाले ने इसके लिए कांवड़ियों को दोष देने के बजाय प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए।

हालांकि, इस तरह के दावों को खबर में दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित घटना की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध न हो।

करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था जरूरी

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशासन के सामने यातायात, सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा, सफाई और शौचालय जैसी व्यवस्थाओं को संभालने की चुनौती रहती है।

ऐसे में बयान में कहा गया कि प्रशासन को भीड़ के पहुंचने से पहले ही पर्याप्त संख्या में मोबाइल टॉयलेट, सफाईकर्मी, कूड़ेदान और कचरा उठाने वाली टीमों की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि धार्मिक आयोजन के दौरान शहर की स्वच्छता प्रभावित न हो।

महाकुंभ से सीख लेने की अपील

बयान का मुख्य संदेश यही है कि प्रयागराज महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन से सीख लेकर हरिद्वार में भी कांवड़ यात्रा के दौरान स्वच्छता का मजबूत सिस्टम तैयार किया जाए।

करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच केवल लोगों से स्वच्छता की अपील करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए प्रशासन को भी पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। खासकर हर की पैड़ी और अन्य प्रमुख भीड़ वाले स्थानों पर मोबाइल टॉयलेट की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

मुख्य बातें
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल।
उत्तराखंड सरकार से प्रयागराज महाकुंभ से सीख लेने की अपील।
महाकुंभ में करीब 65 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का दावा।
मोबाइल टॉयलेट और सफाईकर्मियों की व्यवस्था का उदाहरण दिया गया।
कांवड़ियों को सीधे दोषी ठहराने के बजाय बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात।
हर की पैड़ी पर ज्यादा मोबाइल टॉयलेट लगाने की जरूरत बताई गई।
सफाई, शौचालय और कचरा प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था की मांग।
पानी की बोतलों में पेशाब भरने से जुड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।