रक्षाबंधन कल: ग्रहण को लेकर न हों परेशान, जानिए राखी बांधने का शुभ समय
भोपाल: भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण की खगोलीय घटना होने के कारण लोगों के मन में ग्रहण और सूतक को लेकर कई सवाल हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में इसका सूतक प्रभाव मान्य नहीं माना जा रहा है और बहनें शुभ समय में भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन पर राखी बांधने के तीन शुभ समय
28 अगस्त को राखी बांधने के लिए दिन में अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार बहनें अपनी सुविधा के अनुसार इन समयों में भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांध सकती हैं।
सुबह: 5:45 बजे से 9:45 बजे तक
दोपहर: 1:40 बजे से 4:15 बजे तक
शाम: 6:29 बजे से रात 9:12 बजे तक
वहीं, कुछ पंचांग स्रोत नई दिल्ली के लिए सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताते हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय गणना के आधार पर मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए भोपाल समेत अन्य शहरों में परिवार अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देख सकते हैं।
राहुकाल में राखी बांधने से बचें
रक्षाबंधन के दिन राहुकाल को लेकर भी विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 28 अगस्त को सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक राहुकाल रहेगा।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। ऐसे में इस अवधि को छोड़कर ऊपर बताए गए शुभ समय में राखी बांधी जा सकती है।
रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का संयोग
इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण की खगोलीय घटना होने के कारण पर्व को लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के दिखाई देने और न दिखाई देने के आधार पर सूतक से जुड़े नियमों को माना जाता है। चूंकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसके सूतक को लेकर बाध्यता नहीं मानी जा रही है।
हालांकि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और पंचांगों में ग्रहण व सूतक से जुड़े नियमों में अंतर हो सकता है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
कैसे बांधें भाई को राखी?
रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा की थाली तैयार की जाती है। थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और पूजा सामग्री रखी जा सकती है।
परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान की पूजा की जाती है। इसके बाद भाई को आसन पर बैठाकर उसके माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाया जाता है। फिर अक्षत लगाए जाते हैं और भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है।
राखी बांधने के बाद बहन भाई की आरती करती है और उसे मिठाई खिलाती है। बहन अपने भाई की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती है। वहीं भाई बहन की सुरक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है।
भाई नहीं है तो इष्टदेव को बांध सकती हैं राखी
जिन बहनों के भाई नहीं हैं, वे भी रक्षाबंधन का पर्व अपनी धार्मिक मान्यता और परंपरा के अनुसार मना सकती हैं। कई परिवारों में इस दिन इष्टदेव को रक्षासूत्र या राखी अर्पित करने की परंपरा है।
भगवान गणेश, भगवान शिव, श्रीकृष्ण, श्रीराम, हनुमान जी या मां दुर्गा को राखी अर्पित की जा सकती है। इसके बाद पूजा कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
राखी के त्योहार को लेकर बाजार भी तैयार
रक्षाबंधन को देखते हुए बाजारों में भी राखी, मिठाई और उपहारों की खरीदारी का दौर चल रहा है। बहनें अपने भाइयों के लिए अलग-अलग डिजाइन और पसंद की राखियां खरीद रही हैं। वहीं भाई भी बहनों के लिए कपड़े, मिठाई, गिफ्ट और अन्य उपहार खरीदने की तैयारी में हैं।
इस बार ग्रहण को लेकर लोगों में जरूर सवाल हैं, लेकिन भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने की जानकारी के बाद धार्मिक दृष्टि से राखी बांधने को लेकर बनी असमंजस की स्थिति काफी हद तक दूर हो गई है।
रक्षाबंधन 2026 पर ध्यान रखने वाली बातें
रक्षाबंधन: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार
भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
ग्रहण के कारण भारत में सूतक को लेकर बाध्यता नहीं मानी जा रही है।
सुबह का शुभ समय: 5:45 से 9:45 बजे
दोपहर का शुभ समय: 1:40 से 4:15 बजे
शाम का शुभ समय: 6:29 से 9:12 बजे
राहुकाल: 10:47 बजे से 12:25 बजे तक
स्थानीय शहर के पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
भाई नहीं होने पर इष्टदेव को रक्षासूत्र अर्पित किया जा सकता है।
ग्रहण को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं
रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण के संयोग को लेकर अगर आपके मन में भी सवाल है कि क्या इस बार भाई की कलाई पर राखी बांधने में कोई परेशानी होगी, तो उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण राखी बांधने को लेकर विशेष बाध्यता नहीं है। बस शुभ समय और राहुकाल का ध्यान रखना उचित रहेगा।
इसलिए राखी की थाली तैयार रखिए और भाई-बहन के इस खास रिश्ते को प्रेम और उत्साह के साथ मनाइए।
news desk MPcg