बांधवगढ़ में दर्दनाक हादसा घर में घुसे बाघ ने महिला को मार डाला, तीन घायल; रेस्क्यू के दौरान बाघ की भी मौत से मचा हड़कंप
बांधवगढ़ में दिल दहला देने वाली घटना: घर में घुसे बाघ ने महिला को मार डाला, 3 घायल; रेस्क्यू के दौरान बाघ की भी मौत यह दर्दनाक घटना मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) के पास स्थित पनपथा गांव के खेरवा टोला में हुई। इस हादसे ने एक बार फिर इंसान और वन्यजीव संघर्ष को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना कैसे हुई
रविवार तड़के करीब 3 बजे एक बाघ अचानक रिहायशी इलाके में घुस आया। गांव के लोग उस समय अपने घरों में सो रहे थे। इसी दौरान बाघ ने हमला कर दिया। हमले में 40 वर्षीय फूल बाई पाल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए।
घर में घुसा बाघ
हमले के बाद बाघ मृत महिला के घर के अंदर ही घुस गया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी, लेकिन लोगों का आरोप है कि मदद समय पर नहीं पहुंची।
रेस्क्यू ऑपरेशन और बाघ की मौत
वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ को काबू में करने के लिए ट्रैंक्विलाइजर का इस्तेमाल किया गया। लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो जांच में पता चला कि बाघ की पहले ही मौत हो चुकी थी। इस घटना ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अधिकारियों ने ट्रैंक्विलाइजर ओवरडोज की आशंका से इनकार किया है।
ग्रामीणों का गुस्सा फूटा
लगातार बाघों के हमलों से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। गुस्साए लोगों ने वन विभाग के अधिकारियों का विरोध किया। इस दौरान वन रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव घायल हो गए और एक महिला वन कर्मचारी के साथ भी कथित तौर पर हाथापाई की गई।
शव ले जाने से रोका
ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए करीब दो घंटे तक महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से रोक दिया। लोगों का कहना था कि वन विभाग समय रहते कार्रवाई करता तो शायद महिला की जान बच सकती थी।
बाघ की मौत की होगी दोबारा जांच
बाघ की संदिग्ध मौत को देखते हुए प्रशासन ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रोटोकॉल के तहत दोबारा पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया है। बाघ के शव को जबलपुर में सुरक्षित रखा गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम दोबारा जांच करेगी।
मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मृतका के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के मुफ्त इलाज और अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान प्रतिदिन सहायता राशि देने की बात कही गई है।
बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष
हाल के समय में बाघों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जंगलों के आसपास बसे गांवों में लोगों में डर का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का सिकुड़ता दायरा और मानव गतिविधियों का बढ़ना इस तरह की घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है।
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