केन-बेतवा प्रोजेक्ट विरोध: प्रभावित गांवों में चूल्हाबंदी आंदोलन, ICU में अमित भटनागर का अनशन जारी
छतरपुर (मध्य प्रदेश) | 22 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा आंदोलन अब नए चरण में पहुंच गया है। परियोजना से प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने बुधवार से चूल्हाबंदी आंदोलन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़ी मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर का आमरण अनशन 17वें दिन भी जारी है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। अस्पताल के बाहर सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
ग्रामीणों ने शुरू किया चूल्हाबंदी आंदोलन
केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित गांवों के लोगों ने विरोध के नए तरीके के रूप में चूल्हाबंदी आंदोलन शुरू किया है। ग्रामीणों का दावा है कि कई घरों में बुधवार को खाना नहीं बनाया गया और लोगों ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह प्रतीकात्मक विरोध है, जिसके जरिए वे अपनी समस्याओं और मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
ग्रामीणों की मुख्य मांगों में प्रभावित परिवारों का उचित पुनर्वास, मुआवजे में पारदर्शिता और परियोजना से जुड़े निर्णयों में स्थानीय लोगों की भागीदारी शामिल है।
अमित भटनागर ICU में, अनशन जारी
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर हैं। प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सीएमएचओ डॉ. आरके गुप्ता के अनुसार, अमित भटनागर को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। पिछले दो दिनों से वह आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अमित भटनागर फिलहाल ओरल भोजन नहीं ले रहे हैं। उन्हें आईवी फ्लूइड्स के माध्यम से उपचार दिया जा रहा है। हालांकि, वे पानी और जूस ले रहे हैं।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत आईसीयू में भर्ती मरीजों से मुलाकात सीमित रखी गई है।
मुलाकात रोकने का आंदोलनकारियों का आरोप
आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया है कि अमित भटनागर से मिलने के लिए उनके परिवार, समर्थकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया को अनुमति नहीं दी जा रही है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें पुलिस निगरानी में रखा गया है और उनसे संवाद करने के रास्ते सीमित किए जा रहे हैं।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि आईसीयू में भर्ती मरीज की सुरक्षा और इलाज की व्यवस्था को देखते हुए अस्पताल के नियमों का पालन किया जा रहा है।
20 जुलाई को हटाया गया था चिता आंदोलन
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में छतरपुर के कुपी गांव स्थित बराना नदी घाट पर चल रहा चिता आंदोलन 20 जुलाई को प्रशासन ने हटा दिया था।
प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा था और आंदोलनकारियों को वहां से हटाया गया था। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।
प्रशासन ने कार्रवाई का कारण लगातार बारिश और प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति बताया था। इसके बाद अमित भटनागर को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
फर्जी ग्रामसभा दस्तावेजों का दावा
अमित भटनागर ने आंदोलन के दौरान केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़ी कथित फर्जी ग्रामसभाओं के दस्तावेज सार्वजनिक करने का दावा किया था।
उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज छतरपुर जिले के आधिकारिक रिकॉर्ड से जुड़े हैं और प्रशासन को इस मामले में अपना पक्ष सार्वजनिक करना चाहिए।
भटनागर का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ नहीं है, बल्कि विस्थापित परिवारों के अधिकार, पारदर्शिता और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए है।
उन्होंने मांगें पूरी होने तक आमरण अनशन जारी रखने की बात दोहराई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अनशन खत्म करने की अपील की
अमित भटनागर की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान नेताओं ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है।
इनमें मेधा पाटकर, प्रफुल्ला समांतर, सौम्या दत्ता, इंद्रजीत सिंह, अशोक चौधरी, विश्वनाथ तिर्की, कैलाश मीणा, नीलम अहलूवालिया और क्लाइमेट एक्टिविस्ट लोकेश भिवानी सहित कई लोग शामिल हैं।
उन्होंने वीडियो संदेश और ई-मेल के माध्यम से भटनागर से स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आंदोलन का तरीका बदलने की अपील की।
आदिवासी कांग्रेस ने दिया समर्थन
आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम भी जिला अस्पताल पहुंचे और आंदोलन को समर्थन देने की बात कही।
हालांकि, आंदोलनकारियों का दावा है कि उन्हें भी अमित भटनागर से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
कलेक्टर छुट्टी पर, SP लौटे
प्रदर्शन स्थल से आंदोलनकारियों को हटाने की कार्रवाई के बाद छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल सोमवार से अवकाश पर हैं।
वहीं, पुलिस कार्रवाई के बाद छुट्टी पर गए पुलिस अधीक्षक बुधवार को वापस लौटे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों की गैरमौजूदगी के बीच आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति पर भी नजर बनी हुई है।
क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना विवाद?
केन-बेतवा लिंक परियोजना केंद्र सरकार की प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और जल उपलब्धता बढ़ाना है।
परियोजना समर्थकों का कहना है कि इससे क्षेत्र में कृषि और जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
वहीं, प्रभावित ग्रामीण और आंदोलनकारी विस्थापन, पर्यावरण प्रभाव, मुआवजे और पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
आंदोलन का अगला चरण
फिलहाल छतरपुर में परियोजना प्रभावित गांवों में विरोध जारी है। ग्रामीणों ने चूल्हाबंदी आंदोलन शुरू कर दिया है, जबकि अमित भटनागर अस्पताल से ही अनशन जारी रखने पर अड़े हुए हैं।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रशासन आंदोलनकारियों के साथ बातचीत कर कोई समाधान निकालते हैं या आंदोलन आगे और तेज होता है।
news desk MPcg