MP News: मध्य प्रदेश में दूसरी बार धंसा 2600 करोड़ का उज्जैन-गरोठ हाइवे, 40 फीट ऊंची दीवार 50 मीटर तक क्षतिग्रस्त
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे को जोड़ने वाले गरोठ-उज्जैन हाइवे के ब्रिज की दीवार धंसने से मचा हड़कंप, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
उज्जैन। मध्य प्रदेश में करीब 2600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किए जा रहे उज्जैन-गरोठ हाइवे के निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाइवे पर ब्रिज की करीब 40 से 45 फीट ऊंची दीवार का एक हिस्सा करीब 50 मीटर लंबाई तक धंस गया। घटना के बाद निर्माण कार्य और सड़क की गुणवत्ता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि निर्माणाधीन हाइवे के किसी हिस्से के धंसने की यह दूसरी घटना बताई जा रही है। इससे पहले भी निर्माण के दौरान हाइवे का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर धंस चुका है। लगातार दूसरी बार ऐसी स्थिति बनने से निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
2600 करोड़ से अधिक की लागत से बन रहा हाइवे
उज्जैन-गरोठ हाइवे का निर्माण 2600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जा रहा है। यह परियोजना नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के माध्यम से एक निजी एजेंसी द्वारा तैयार की जा रही है।
यह हाइवे उज्जैन के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। खास तौर पर सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन को देश के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों, स्टेट हाईवे और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है।
उज्जैन-गरोठ हाइवे की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सामने आई यह घटना प्रशासन और NHAI के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है।
40 से 45 फीट ऊंची दीवार 50 मीटर तक धंसी
जानकारी के मुताबिक, गरोठ-उज्जैन हाइवे पर निर्माणाधीन ब्रिज की करीब 40 से 45 फीट ऊंची दीवार का हिस्सा धंस गया। प्रभावित हिस्सा करीब 50 मीटर लंबा बताया जा रहा है।
घटना का वीडियो स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बनाया गया और इसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया। वीडियो सामने आने के बाद हाइवे के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
बताया जा रहा है कि जिस समय यह हिस्सा धंसा, उस दौरान हाइवे पर ट्रैफिक भी चल रहा था। ऐसे में निर्माणाधीन संरचना की सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दूसरी बार सामने आई ऐसी घटना
उज्जैन-गरोठ हाइवे के निर्माण के दौरान इस तरह की घटना पहले भी सामने आ चुकी है। अब दोबारा ब्रिज की दीवार के धंसने से परियोजना की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोगों का सवाल है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की जा रही इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में यदि बार-बार सड़क या ब्रिज का हिस्सा धंसता है, तो इसकी वजह क्या है? निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, मिट्टी की मजबूती, जल निकासी और इंजीनियरिंग मानकों की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बनाने की तैयारी
घटना के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और उसे दोबारा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। संबंधित एजेंसी की ओर से प्रभावित हिस्से को दुरुस्त किया जाएगा।
हालांकि, इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि मरम्मत के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता की विस्तृत जांच होगी या नहीं। यदि सिर्फ क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बना दिया जाता है और मूल कारण की जांच नहीं होती, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को लेकर चिंता बनी रह सकती है।
सिंहस्थ 2028 से पहले अहम परियोजना
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े स्तर पर विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट चल रहे हैं। शहर को अलग-अलग दिशाओं से बेहतर सड़क कनेक्टिविटी देने के लिए नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।
ऐसे में उज्जैन-गरोठ हाइवे को भी महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इस हाइवे के तैयार होने से उज्जैन की कनेक्टिविटी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे समेत दूसरे प्रमुख मार्गों से बेहतर होने की उम्मीद है।
लेकिन निर्माण के दौरान लगातार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं के कारण अब परियोजना की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी हो गया है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की नजर अब इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस घटना के बाद क्या तकनीकी जांच करता है और क्षतिग्रस्त हिस्से को किस मानक के अनुसार दोबारा तैयार किया जाता है।
फिलहाल ब्रिज की दीवार धंसने की घटना ने 2600 करोड़ रुपये से अधिक की इस बड़ी सड़क परियोजना की निर्माण गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
news desk MPcg