पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं थे पैसे, मजबूर पति नर्मदा में शव प्रवाहित करने वाला था; इनायत अली ने कराया अंतिम संस्कार
हादसे के बाद अस्पताल में हुई आरती की मौत
जबलपुर में इंसानियत और सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश करने वाला मामला सामने आया है। शहपुरा निवासी आरती विश्वकर्मा की सड़क हादसे के बाद इलाज के दौरान जबलपुर के जिला सरकारी अस्पताल में मौत हो गई। आरती के पति श्याम विश्वकर्मा होटल में बर्तन धोकर परिवार का गुजारा करते हैं। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण पत्नी की मौत के बाद उनके सामने अंतिम संस्कार कराने तक का संकट खड़ा हो गया।
मदद के लिए भटकता रहा श्याम
पत्नी की मौत के बाद श्याम ने रिश्तेदारों और परिचितों से आर्थिक मदद मांगी, लेकिन उसे पर्याप्त सहायता नहीं मिल सकी। बताया गया कि जबलपुर में अंतिम संस्कार के लिए करीब पांच हजार रुपये तक खर्च हो सकते हैं। इतनी रकम जुटा पाना श्याम के लिए मुश्किल था। पत्नी के शव के सामने बेबस श्याम के पास कोई रास्ता नहीं बचा तो उसने बेहद मजबूरी में शव को नर्मदा नदी में प्रवाहित करने का विचार कर लिया।
अस्पताल स्टाफ ने दी गरीब नवाज कमेटी को सूचना
श्याम की मजबूरी की जानकारी अस्पताल के कर्मचारियों को हुई। इसके बाद उन्होंने गरीब नवाज कमेटी से जुड़े समाजसेवी इनायत अली को पूरे मामले की जानकारी दी। इनायत अली लंबे समय से आर्थिक रूप से कमजोर और लावारिस लोगों के अंतिम संस्कार में मदद करते आ रहे हैं। जानकारी मिलते ही वह अस्पताल पहुंचे और श्याम को भरोसा दिलाया कि उसकी पत्नी का अंतिम संस्कार सम्मान के साथ कराया जाएगा।
इनायत अली ने बढ़ाया मदद का हाथ
इनायत अली पेशे से मैकेनिक हैं, लेकिन सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहते हैं। गरीब नवाज कमेटी के माध्यम से वह अब तक कई जरूरतमंद और लावारिस लोगों के अंतिम संस्कार तथा कफन-दफन की व्यवस्था में सहयोग कर चुके हैं। आरती के मामले में भी उन्होंने श्याम की आर्थिक परेशानी को समझते हुए उसकी मदद की और अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था अपने स्तर पर कराई।
ग्वारीघाट मुक्तिधाम में हुआ अंतिम संस्कार
इनायत अली अपने एक साथी के साथ आरती विश्वकर्मा की पार्थिव देह को जिला अस्पताल से लेकर ग्वारीघाट मुक्तिधाम पहुंचे। यहां आरती का अंतिम संस्कार पूरे रीति-रिवाज के साथ कराया गया। जिस महिला की पार्थिव देह को आर्थिक मजबूरी के कारण नर्मदा में प्रवाहित करने की नौबत आ गई थी, उसे आखिरकार सम्मान के साथ अंतिम विदाई मिली।
श्याम ने कहा- मदद नहीं मिलती तो शव नदी में छोड़ देता
श्याम विश्वकर्मा ने बताया कि पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं होने के कारण वह बेहद परेशान था। उसके मुताबिक अगर गरीब नवाज कमेटी और इनायत अली मदद के लिए आगे नहीं आते तो उसके पास पत्नी के शव को नर्मदा में प्रवाहित करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। उसने मदद करने वाले लोगों के प्रति आभार जताया।
इनायत अली बोले- जरूरतमंद की मदद करना ही इंसानियत
इनायत अली का कहना है कि वह कई वर्षों से गरीब और असहाय लोगों की मदद कर रहे हैं। उन्हें जब श्याम की परेशानी के बारे में पता चला तो वह तुरंत अस्पताल पहुंचे। उनका कहना है कि आरती को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दिलाना जरूरी था और इसी उद्देश्य से अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई।
सद्भाव का संदेश दे रहा जबलपुर का यह मामला
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब छोटी-छोटी बातों को लेकर समाज में विभाजन की बातें देखने को मिलती हैं। जबलपुर की यह तस्वीर बताती है कि जरूरत के वक्त इंसानियत सबसे बड़ा धर्म बन जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए दूसरे समुदाय से जुड़े व्यक्ति का आगे आना और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार में सहयोग करना सामाजिक सद्भाव का मजबूत संदेश दे रहा है।
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