जबलपुर की ट्रैफिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- सुधार के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी
जाम, बदहाल सिग्नल और अतिक्रमण पर कोर्ट की टिप्पणी; ट्रैफिक इंजीनियरिंग, एजुकेशन और एनफोर्समेंट तीनों मोर्चों पर काम करने के निर्देश
जबलपुर शहर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शहर में लगातार सामने आ रही ट्रैफिक जाम, खराब सिग्नल व्यवस्था और सड़कों पर अतिक्रमण की समस्या पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि प्रशासन की ओर से कुछ सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, लेकिन यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए अभी काफी काम किया जाना बाकी है। कोर्ट ने ट्रैफिक प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यह मामला नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है।
ट्रैफिक व्यवस्था के तीनों पहलुओं पर एक साथ काम जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था सिर्फ पुलिस की मौजूदगी या चालान कार्रवाई से बेहतर नहीं हो सकती। इसके लिए ट्रैफिक इंजीनियरिंग, ट्रैफिक एजुकेशन और ट्रैफिक एनफोर्समेंट यानी यातायात प्रबंधन के तीनों पहलुओं पर सक्रियता से काम करना जरूरी है। ट्रैफिक इंजीनियरिंग के तहत सड़कों, चौराहों, सिग्नल और यातायात के प्रवाह को व्यवस्थित करना होगा। वहीं ट्रैफिक एजुकेशन के जरिए वाहन चालकों और आम नागरिकों को नियमों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई यानी एनफोर्समेंट भी लगातार होना चाहिए।
विशेषज्ञों की समिति बनाने की दिशा में निर्देश
कोर्ट ने जबलपुर की ट्रैफिक समस्या के स्थायी समाधान के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने की जरूरत पर जोर दिया है। इसके लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। समिति के जरिए शहर की मौजूदा यातायात व्यवस्था का तकनीकी स्तर पर अध्ययन किया जा सकता है। इसमें किन चौराहों पर सबसे ज्यादा दबाव है, कहां सिग्नल व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, किन सड़कों पर अतिक्रमण के कारण यातायात प्रभावित होता है और किस तरह यातायात का दबाव कम किया जा सकता है, जैसे मुद्दों पर काम किया जा सकता है।
सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराने में अधिकारियों की जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने सड़कों पर अतिक्रमण को भी ट्रैफिक समस्या की बड़ी वजहों में शामिल किया है। कोर्ट ने अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझने और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त रखने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत बताई। शहर की प्रमुख सड़कों और बाजार क्षेत्रों में यदि सड़क का हिस्सा अस्थायी या स्थायी कब्जे में चला जाता है तो वाहनों के लिए उपलब्ध जगह कम हो जाती है। इसका सीधा असर यातायात की गति पर पड़ता है और पीक आवर्स में जाम की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में सिर्फ ट्रैफिक पुलिस की तैनाती से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
खराब सिग्नल और जाम पर भी कोर्ट की नजर
जनहित याचिका में जबलपुर की ट्रैफिक व्यवस्था में सिग्नल की स्थिति और जाम जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान माना कि इन समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, लेकिन अभी अपेक्षित सुधार बाकी है। शहर में यातायात का दबाव लगातार बढ़ने के साथ पुराने ट्रैफिक सिस्टम को भी समय-समय पर अपग्रेड करने की जरूरत होती है। यदि सिग्नल टाइमिंग, सड़क की क्षमता और वाहनों की संख्या के बीच तालमेल नहीं हो तो चौराहों पर अनावश्यक जाम की स्थिति बन सकती है।
9 सितंबर को हुई सुनवाई, 28 सितंबर वाले सप्ताह में अगली सुनवाई
इस मामले की सुनवाई 9 सितंबर को न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ में हुई। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय और अधिवक्ता मोहम्मद साजिद ने पक्ष रखा। कोर्ट ने मामले में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर करने के लिए किए जा रहे प्रयासों और आगे की जरूरतों पर निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। इस दौरान प्रशासन की ओर से किए गए प्रयासों और आगे की कार्ययोजना पर भी नजर रहेगी।
अब सवाल यह कि जमीन पर कितना बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जबलपुर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए अब जमीनी स्तर पर क्या बदलाव किए जाते हैं। सिर्फ सिग्नल सुधारना या समय-समय पर अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को वैज्ञानिक और दीर्घकालिक तरीके से व्यवस्थित करना होगा। विशेषज्ञों की समिति यदि गठित होती है तो उसकी रिपोर्ट और सुझावों को लागू करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना, सड़कों को अतिक्रमण मुक्त रखना और यातायात नियमों के पालन को प्रभावी बनाना जरूरी होगा। अगली सुनवाई में कोर्ट की नजर इन प्रयासों की प्रगति पर रहेगी।
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news desk MPcg