ग्वालियर में बनेगा भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, ₹15 हजार करोड़ तक निवेश की तैयारी; 14 हजार युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

ग्वालियर में बनेगा भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, ₹15 हजार करोड़ तक निवेश की तैयारी; 14 हजार युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

मुंबई में CM मोहन यादव और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया बड़ा निवेश रोड शो, टेलीकॉम कंपनियों को MP में यूनिट लगाने का न्योता; 350 एकड़ में विकसित होगा हाईटेक टेक्नोलॉजी हब

मध्यप्रदेश को देश के बड़े टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्वालियर में भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (Telecom Manufacturing Zone) स्थापित किया जाएगा।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुंबई में आयोजित हाई-लेवल इन्वेस्टर्स मीट और रोड शो में देश-विदेश की प्रमुख कंपनियों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

कार्यक्रम में टेलीकॉम हार्डवेयर निर्माता, नेटवर्क उपकरण कंपनियां, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े निवेशक शामिल हुए। राज्य सरकार ने निवेशकों को मध्यप्रदेश की उद्योग नीति, आसान अनुमतियों और तैयार औद्योगिक सुविधाओं की जानकारी दी।

ग्वालियर को मिलेगा देश के टेलीकॉम हब का दर्जा

ग्वालियर में विकसित होने वाला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड टेक्नोलॉजी हब के रूप में तैयार किया जाएगा।

इस परियोजना का उद्देश्य केवल उत्पादों की असेंबली करना नहीं, बल्कि टेलीकॉम सेक्टर की पूरी वैल्यू चेन को एक ही परिसर में विकसित करना है।

यहां कंपनियों को एक ही जगह पर:

रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर,
डिजाइन और इंजीनियरिंग सुविधा,
प्रोडक्ट टेस्टिंग लैब,
सर्टिफिकेशन सुविधा,
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट,
सप्लाई चेन नेटवर्क

जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

350 एकड़ में विकसित होगा टेलीकॉम जोन

ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए कुल 350 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है।

परियोजना के पहले चरण के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने 170 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है।

इसमें:

100 एकड़ जमीन स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (SADA) क्षेत्र में
70 एकड़ जमीन ग्वालियर IT पार्क में

शामिल है।

राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई इस जमीन का अनुमानित मूल्य ₹596 करोड़ से अधिक बताया गया है।

आने वाले चरणों में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त जमीन भी उपलब्ध कराई जाएगी।

केंद्र सरकार दे रही ₹493 करोड़ की मदद

इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता दी है।

पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ने ₹493 करोड़ की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता मंजूर की है।

परियोजना को लागू करने के लिए विशेष उद्देश्य संस्था यानी SPV (Special Purpose Vehicle) बनाई गई है।

इसमें:

मध्यप्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।

इस साझेदारी के जरिए परियोजना के निर्माण, संचालन और विस्तार को गति दी जाएगी।

मोबाइल से लेकर 6G तकनीक तक होगा निर्माण

ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में भविष्य की तकनीकों से जुड़े उत्पादों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

यहां बनने वाले प्रमुख उत्पादों में शामिल होंगे:

मोबाइल हार्डवेयर

मोबाइल फोन के विभिन्न कंपोनेंट और हार्डवेयर निर्माण की सुविधा विकसित की जाएगी।

ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क

देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

नेटवर्क उपकरण

राउटर, कम्युनिकेशन इक्विपमेंट और नेटवर्किंग डिवाइस बनाए जाएंगे।

सेमीकंडक्टर और एडवांस टेक्नोलॉजी

भविष्य की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को ध्यान में रखते हुए सेमीकंडक्टर से जुड़े क्षेत्रों पर भी फोकस रहेगा।

5G और 6G इंफ्रास्ट्रक्चर

आने वाले वर्षों में हाई-स्पीड नेटवर्क तकनीक के लिए जरूरी उपकरणों का निर्माण किया जाएगा।

पहले चरण से ही ₹3500 करोड़ से ज्यादा निवेश प्रस्ताव

राज्य सरकार ने पहले चरण में करीब ₹2000 करोड़ निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा था।

लेकिन निवेशकों की बढ़ती रुचि के चलते शुरुआती चरण में ही यह लक्ष्य पार होता दिखाई दे रहा है।

अब तक प्रमुख कंपनियों की ओर से ₹3500 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होने की जानकारी दी गई है।

इनमें प्रमुख निवेशक कंपनियों में:

HFCL
Dixon Technologies
VVDN

जैसी कंपनियां शामिल हैं।

सरकार का अनुमान है कि परियोजना के सभी चरण पूरे होने के बाद कुल निवेश क्षमता ₹10 हजार करोड़ से ₹15 हजार करोड़ तक पहुंच सकती है।

14 हजार हाई-स्किल नौकरियों का अनुमान

टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

परियोजना के पूरी तरह विकसित होने के बाद लगभग 14 हजार प्रत्यक्ष तकनीकी रोजगार मिलने का अनुमान लगाया गया है।

इसके अलावा:

छोटे उद्योगों,
सप्लायर कंपनियों,
परिवहन,
लॉजिस्टिक्स,
सर्विस सेक्टर

में भी हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

निवेशकों को मिलेगी आसान मंजूरी और प्लग एंड प्ले सुविधा

मुंबई रोड शो के दौरान मध्यप्रदेश सरकार ने निवेशकों को राज्य की सुविधाओं के बारे में जानकारी दी।

सरकार ने बताया कि प्रदेश में:

पारदर्शी औद्योगिक नीति,
सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम,
तैयार औद्योगिक भूमि,
बिजली और आधारभूत सुविधाएं

उपलब्ध हैं।

निवेशकों को कम समय में उत्पादन शुरू करने के लिए प्लग एंड प्ले इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था को उद्योगों से जोड़ेगी सरकार

टेलीकॉम और तकनीकी उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव कर रही है।

भोपाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर आयोजित कार्यशाला में भविष्य के पाठ्यक्रमों और रोजगार आधारित शिक्षा पर चर्चा हुई।

कार्यशाला में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए।

इस दौरान विशेषज्ञों ने:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI),
साइबर सुरक्षा,
क्वांटम कंप्यूटिंग,
ब्लॉकचेन,
डिजिटल टेक्नोलॉजी,
उद्योग-अकादमिक साझेदारी

जैसे विषयों पर चर्चा की।

NEP-2020 से तैयार होंगे भविष्य के तकनीकी विशेषज्ञ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक उद्योगों की जरूरत के अनुसार तैयार करना है।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने NEP-2020 लागू किया।

सरकार का उद्देश्य है कि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में:

भारतीय ज्ञान परंपरा,
तकनीकी कौशल,
रोजगार आधारित प्रशिक्षण,
उद्योग की जरूरतों के अनुसार विषय

शामिल किए जाएं।

मध्यप्रदेश की औद्योगिक तस्वीर बदलने की तैयारी

ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन को मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की बड़ी परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि यह जोन आने वाले वर्षों में भारत के टेलीकॉम हार्डवेयर निर्माण का प्रमुख केंद्र बने।

निवेश, तकनीक, रोजगार और कौशल विकास को एक साथ जोड़कर मध्यप्रदेश को नई औद्योगिक पहचान देने की तैयारी की जा रही है।