CAA Before Lok Sabha: आचार संहिता के पहले नया चुनावी दांव, समान नागरिकता कानून लाएगी सरकार

CAA Before Lok Sabha: आचार संहिता के पहले नया चुनावी दांव, समान नागरिकता कानून लाएगी सरकार

CAA Before Lok Sabha: आचार संहिता के पहले नया चुनावी दांव,  समान नागरिकता कानून लाएगी सरकार

CAA Before Lok Sabha: अपने तीसरे कार्यकाल को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले देश में समान नागरिक संहिता कानून यानि की CAA लागू करने की मानसिकता बना ली है। लगभग चार साल से ज्यादा लम्बे समय के इंतजार के बाद केन्द्र सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून लागू करने का फैसला बना लिया है। यह कानून अगलें महीने मार्च से पहले हफ्ते में लागू किया जा सकता है। आपको बता दें कि सरकार ने इसे लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है। तथा संबंधित नियम-कानून भी तैयार कर लिए गए है।अब किसी भी समय इनकी अधिसूचना जारी हो सकती है। कानून लागू होने के बाद भारत के तीन पड़ौसी देशों पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता हासिल होने का रास्ता साफ हो जाएगा। 

कानून के तहत ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार

सूत्रों की मानें तो इस कानून के तहत आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार कर लिए गये है।इस पोर्टल का ‘ट्राॅयल’ भी ले लिया है।  गौरतलब है, कि नागरिकता के लिए सभी आवेदन ऑन लाईन ही किए जाएगें। कुल मिलाकर अब इस मुद्दें को चुनावी राजनीति से पूरी तरह जोड़कर देखा जा रहा है, अब यह एक अलग बात है कि इस मुद्दें से देश में सत्तारूढ़ दल को राजनीतिक लाभ मिलता भी है या नहीं? 

करीब सवा चार साल बाद लागू होगा CAA

आपको बता दे कि संसद ने समान नागरिक संहिता कानून पर ग्यारह दिसम्बर 2019 करीब सवा चार साल पहले मंजूरी की मौहर लगा दी थी। लेकिन देरी के कारण इतनी लम्बी अवधि के बाद इसे लागू किया जाने वाला है। सरकार ने इस बारे में उस समय इतनी जल्दबाजी दिखाई थी। कि ग्यारह दिसम्बर 2019 को राज्यसभा से मंजूरी मिलने के दूसरे ही दिन राष्ट्रपति की भी मंजूरी ले ली गई थी। इसके बाद देश में इसके विरोध का दौर चला। दिल्ली के शाहीनबाग में कई दिनों तक इसके खिलाफ आंदोलन चलता रहा। जबकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया था। कि इस कानून के तहत किसी की भी नागरिकता छीनी नही जाएगी।

 चुनावों के पूर्व CAA बना राजनीतिक विवाद का विषय

इस कानून के तहत् पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसम्बर 2014 के पहले भारत आने वाले छः वर्ग के अल्पसंख्यकों को नागरिकता उपलब्ध कराई जा सकेगी। संसदीय प्रक्रिया के मुताबिक किसी भी कानून के दिशा-निर्देश राष्ट्रपति से स्वीकृति मिलने के छः माह की अवधि में तैयार होने चाहिए।अन्यथा सरकार को संसद के दोनों सदनों में विधान समितियों से विस्तार की मांग करनी चाहिए, इस मामले में 2020 से केन्द्रीय गृह मंत्रालय कानून से जुड़े नियमों को तैयार करने की प्रक्रिया जारी रखने के लिए संसदीय समितियों से नियमित रूप से विस्तार की मांग करता रहा है। लेकिन अब लोकसभा चुनावों के पूर्व इन्हें लागू किये जाने की तैयारी है। इसलिए इसे राजनीतिक विवाद का विषय बना दिया गया है।