पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना के एमओयू पर सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना के एमओयू पर सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना के एमओयू पर सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी


जयपुर। Parvati-Kalisindh-Chambal Link Project News: राजस्थान सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के मध्य संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना के लिए हुए एमओयू पर उच्चतम न्यायालय ने मुहर लगा दी है। इससे ईआरसीपी का मार्ग खुल गया है। उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश द्वारा ईआरसीपी के सम्बन्ध में दायर याचिका पर इस आधार पर निपटारा कर दिया है कि संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना पर त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।जिसके फलस्वरुप संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना के लिए हुए एमओयू को लागू जाने का मार्ग खुल गया है।आपको बता दें कि इस सम्बन्ध में पूर्व में राजस्थान सरकार के ईआरसीपी के प्रस्ताव को नकारते हुए मप्र सरकार द्वारा स्वयं के हितों के संरक्षण हेतु सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की गई थी, परन्तु केन्द्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश सरकार के बीच परियोजना की संयुक्त डीपीआर बनाने के लिए नई दिल्ली में त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और दोनों राज्यों के बीच में विवाद की स्थिति समाप्त हो गई।

किए गए एमओयू के अनुसार पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना में सम्मिलित रामगढ़ बैराज, महलपुर बैराज, नवनैरा बैराज, मेज बैराज, राठौड़ बैराज, डूंगरी बांध, रामगढ़ बैराज से डूंगरी बांध तक फीडर तंत्र, ईसरदा बांध का क्षमता वर्धन एवं पूर्वनिर्मित 26 बांधों का पुनरूद्धार किया जाएगा।ईआरसीपी के तहत पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, भरतपुर, दौसा, अलवर, जयपुर, अजमेर एवं टोंक में पेयजल उपलब्ध होगा। इसके अतिरिक्त, राज्य के 2,80,000 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस परियोजना से 13 जिलों के लगभग 25 लाख किसान परिवारों को सिंचाई जल एवं राज्य की लगभग 40 प्रतिशत आबादी को पेयजल ‎मिल सकेगा। साथ ही भूजल के स्तर में भी बढ़ोतरी होगी।