सुप्रीम कोर्ट: "विजय शाह की नीयत पर संदेह", SIT को 13 अगस्त तक जांच रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह को लगाई कड़ी फटकार, सेना की महिला अधिकारी पर आपत्तिजनक टिप्पणी को बताया गंभीर मुद्दा
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2025
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सोमवार को सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मंत्री का अब तक सार्वजनिक रूप से माफी न मांगना उनकी "नीयत और ईमानदारी" पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने तीखी नाराज़गी जताते हुए टिप्पणी की, "ऐसे वक्तव्यों का सार्वजनिक जीवन में कोई स्थान नहीं है, विशेषकर तब जब वे भारतीय सेना की गरिमा को आघात पहुँचाते हैं। एक संवैधानिक पद पर रहते हुए इस प्रकार की टिप्पणी न केवल असंवेदनशीलता दर्शाती है, बल्कि यह संदेह भी उत्पन्न करती है कि क्या यह जानबूझकर की गई कोशिश थी।"
कोर्ट ने माफी न मांगने को बताया गंभीर संकेत
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्न की पीठ ने कहा कि मंत्री का व्यवहार यह संकेत देता है कि वे अपनी गलती को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि, "इस तरह के मामलों में त्वरित रूप से माफी माँगना एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है। किंतु मंत्री विजय शाह द्वारा अब तक सार्वजनिक रूप से कोई खेद प्रकट न करना न केवल उनके चरित्र की परीक्षा है, बल्कि इससे यह भी प्रतीत होता है कि वे अपने शब्दों के प्रभाव को समझने को तैयार नहीं हैं।"
एसआईटी को 13 अगस्त तक जांच पूरी करने का निर्देश
इस गंभीर मामले को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को निर्देश दिया कि वह 13 अगस्त 2025 तक जांच पूरी करके अदालत में रिपोर्ट पेश करे। अदालत ने टिप्पणी की कि अब और देरी स्वीकार्य नहीं है, और मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।
कोर्ट ने कहा, "यह एक संवेदनशील मामला है, जिसमें सेना की प्रतिष्ठा और महिला अधिकारी के सम्मान का सवाल है। ऐसी स्थिति में केवल निष्पक्ष जांच ही नहीं, बल्कि तेज़ कार्रवाई भी आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई जनप्रतिनिधि इस प्रकार की टिप्पणी करने से पहले सोचने को मजबूर हो।"
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद उस समय आरंभ हुआ जब मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कथित तौर पर आपत्तिजनक और अनुचित भाषा का प्रयोग किया, जो न केवल एक महिला अधिकारी के सम्मान के विरुद्ध था, बल्कि इससे सेना की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुँची।
कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की प्रतिष्ठित अधिकारी हैं, और देश-विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनके खिलाफ की गई इस टिप्पणी से ना सिर्फ सैन्य समुदाय, बल्कि आम जनता में भी रोष उत्पन्न हुआ। इसके बाद सामाजिक संगठनों, पूर्व सैन्य अधिकारियों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया और मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा।
राजनीतिक दबाव में भी न्यायिक सक्रियता की मिसाल
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दर्शाता है कि देश की सर्वोच्च अदालत राजनीतिक हस्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में संकोच नहीं करती, भले ही वह किसी भी सत्ताधारी दल से क्यों न हो। सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख इस बात का संकेत है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से उच्च नैतिक मानदंडों की अपेक्षा की जाती है, और यदि वे इससे चूकते हैं, तो उन्हें कानून के कठघरे में लाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम न केवल एक संवेदनशील मामले में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्तियों को अपने शब्दों और व्यवहार के प्रति अधिक सतर्क और जिम्मेदार होना चाहिए। आगामी सुनवाई और एसआईटी की रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करेगी, लेकिन फिलहाल न्यायपालिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सेना और महिला सम्मान से जुड़े मामलों में कोई कोताही स्वीकार्य नहीं होगी।
news desk MPcg