इंदौर की स्वच्छता छवि पर ‘जहरीले पानी’ का साया, दूषित पेयजल से मची तबाही

इंदौर की स्वच्छता छवि पर ‘जहरीले पानी’ का साया, दूषित पेयजल से मची तबाही
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1. इंदौर की स्वच्छता छवि पर ‘जहरीले पानी’ का साया, दूषित पेयजल से मची तबाही

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की चमक पर अब दूषित पानी का गहरा दाग लग गया है। भागीरथपुरा इलाके में फैले डायरिया के पीछे की असली वजह एक ताजा लैब टेस्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दूषित पेयजल ही इस बीमारी का कारण बना, जिससे अब तक कम से कम 4 लोगों की मौत हो चुकी है और 1400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में यह खुलासा चौंकाने वाला है, जहां पिछले आठ सालों से स्वच्छता में नंबर-1 रहने का तमगा लगा है। इंदौर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने पुष्टि की कि मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में भागीरथपुरा में पाइपलाइन लीकेज के कारण पानी दूषित होने की बात सामने आई है।

जांच में पाया गया कि पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन में उस स्थान पर लीकेज था, जहां शौचालय बना हुआ है। इसी लीकेज के जरिए गंदगी पानी में मिली और बीमारी फैलती चली गई।

अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि पूरे इलाके की पाइपलाइन की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि किसी अन्य लीकेज की संभावना को खत्म किया जा सके। जांच के बाद गुरुवार से घरों में साफ पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है, हालांकि एहतियातन लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है।

भागीरथपुरा की इस त्रासदी से सबक लेते हुए राज्य सरकार अब पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करेगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 1714 घरों के सर्वे में 8571 लोगों की जांच की गई, जिनमें 338 में उल्टी-दस्त के लक्षण मिले। बीमारी के आठ दिनों में 272 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 71 को छुट्टी मिल चुकी है। फिलहाल 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें 32 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

स्वच्छता की मिसाल बने इंदौर के लिए यह घटना एक गंभीर चेतावनी है, जिसने सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।