पश्चिम बंगाल में नया आदेश लागू: मदरसों की सुबह शुरू होगी ‘वंदे मातरम’ से
बंगाल में बड़ा फैसला: सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य, नया आदेश लागू
पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए राज्य के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है। यह आदेश 19 मई को जारी किया गया था, जो अब सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त सभी मदरसों पर लागू होगा। इसके तहत अब हर सुबह की असेंबली में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य होगा।
मदरसों की प्रार्थना व्यवस्था में बड़ा बदलाव, राष्ट्रगीत को मिली प्राथमिकता
नए आदेश के बाद अब मदरसों में सुबह की प्रार्थना सभा की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ से होगी। इससे पहले यहां ‘जन गण मन’ और अन्य क्षेत्रीय गीत गाए जाते थे। अब सभी संस्थानों को इस बदलाव का पालन करते हुए शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भी सौंपनी होगी।
बंगाल सरकार के 12 दिनों में 12 बड़े फैसले, राज्य में तेजी से बदलाव
नए प्रशासन के आने के बाद महज 12 दिनों में सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। इनमें CAA लागू करने की प्रक्रिया, BSF को सीमा फेंसिंग के लिए जमीन, आयुष्मान भारत योजना को लागू करना और नई शिक्षा व प्रशासनिक नीतियां शामिल हैं।
CAA से लेकर आयुष्मान भारत तक, बंगाल में नीतिगत बदलाव तेज
राज्य सरकार ने CAA के तहत पात्र समुदायों के लिए नागरिकता प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। साथ ही गरीबों के लिए आयुष्मान भारत योजना लागू की गई है, जिससे लाखों परिवारों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।
सीमा सुरक्षा से लेकर शिक्षा तक, कई क्षेत्रों में बड़े फैसले
सरकार ने BSF को 600 एकड़ जमीन देने का निर्णय लिया है ताकि भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग मजबूत की जा सके। इसके अलावा राज्य में नई भर्ती नीतियां, आयु सीमा में छूट और प्रशासनिक सुधार जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
राजनीति और नीतियों में तेजी से बदलाव, बंगाल में नई दिशा की शुरुआत
नए फैसलों में महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजना, मुफ्त बस यात्रा, पुरानी नियुक्तियों को रद्द करना और धर्म आधारित योजनाओं में बदलाव जैसे निर्णय शामिल हैं। सरकार का दावा है कि ये सभी कदम विकास और समानता को बढ़ावा देंगे।
‘वंदे मातरम’ आदेश पर चर्चा तेज, राजनीतिक हलचल बढ़ी
मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य करने के फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे राष्ट्रीय एकता का कदम बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे विवादास्पद निर्णय मान रहे हैं।
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