छत्तीसगढ़ सरकार ग्रीन स्टील को देगी बढ़ावा, नई नीति में स्टील उद्योग के लिए अनुदान योजनाएं

छत्तीसगढ़ सरकार ग्रीन स्टील को देगी बढ़ावा, नई नीति में स्टील उद्योग के लिए अनुदान योजनाएं

छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति में स्टील सेक्टर को विशेष प्रोत्साहन: मुख्यमंत्री साय

ग्रीन स्टील उत्पादन को मिलेगा अनुदान, अधोसंरचना और नीति सुधारों से निवेश को मिलेगा बल

रायपुर, 29 जुलाई
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति में स्टील सेक्टर को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ग्रीन स्टील के उत्पादन को अतिरिक्त प्रोत्साहन और विशेष अनुदान प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री साय आज रायपुर के एक स्थानीय होटल में ग्रीन स्टील एवं माइनिंग समिट को संबोधित कर रहे थे, जिसका आयोजन कॉनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज़ (CII) द्वारा पूर्वी भारत के उद्योगपतियों के लिए किया गया था।

छत्तीसगढ़ में स्टील उद्योग के लिए अपार संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने देशभर के स्टील उद्यमियों को छत्तीसगढ़ में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने का आमंत्रण देते हुए कहा कि राज्य में न केवल भरपूर खनिज संसाधन उपलब्ध हैं, बल्कि उद्योगों के लिए सुदृढ़ अधोसंरचना और नीतिगत समर्थन भी मौजूद है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की स्टील उत्पादन क्षमता को 28 मिलियन टन से बढ़ाकर 45 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा गया है।

ग्रीन स्टील को मिलेगा बढ़ावा, हाइड्रोजन तकनीक को समर्थन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन स्टील इकाइयों को राज्य सरकार विशेष अनुदान देगी। हाइड्रोजन जैसे आधुनिक तकनीकी समाधानों को राज्य में अपनाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है।

औद्योगिक विकास के लिए सशक्त अधोसंरचना

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में 47,000 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है, जिससे औद्योगिक माल की ढुलाई में लागत कम होगी। रायगढ़ के खरसिया से राजनांदगांव के परमालकसा तक नया रेल नेटवर्क और रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना जैसे कार्य प्रगति पर हैं।

इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए 350 से अधिक सुधार

नई औद्योगिक नीति में सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और 350 से अधिक नीतिगत सुधार लागू किए गए हैं। इससे निवेशकों को त्वरित अनुमतियाँ और पारदर्शिता मिल रही है। साथ ही ग्रीन एनर्जी आधारित इकाइयों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की नीति बनाई गई है।

‘अंजोर विज़न’ में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रमुखता

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत @2047 की परिकल्पना के अनुरूप ‘अंजोर विज़न’ दस्तावेज़ तैयार किया गया है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, विशेषकर स्टील एवं पावर इंडस्ट्री को केंद्र में रखा गया है।

औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक नीति और प्रशिक्षित जनशक्ति

मुख्यमंत्री ने बताया कि औद्योगिक कॉरिडोर एवं नए औद्योगिक पार्क के विकास कार्य तेज़ गति से चल रहे हैं। निजी क्षेत्र को भी औद्योगिक पार्क स्थापित करने हेतु प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
बस्तर के सभी विकासखंडों में स्किल इंडिया केंद्र खोले गए हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित जनशक्ति के रूप में तैयार किया जा रहा है। राज्य की नई लॉजिस्टिक नीति के अंतर्गत ड्राय पोर्ट और कंटेनर डिपो जैसे प्रोजेक्ट्स पर अनुदान भी दिया जा रहा है।

स्टील क्लस्टर और कनेक्टिविटी में निवेश

मुख्यमंत्री ने रायपुर-दुर्ग-भिलाई क्षेत्र को मिलाकर स्टेट कैपिटल रीजन के रूप में एक स्टील क्लस्टर विकसित करने की योजना का उल्लेख किया। छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति इसे लॉजिस्टिक के क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। एक्सप्रेसवे, रेलवे और राजमार्गों के ज़रिए राज्य देश के चारों दिशाओं से जुड़ता है।

साढ़े तीन लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त

मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ माह पूर्व आयोजित एनर्जी समिट में ₹3.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से ₹57,000 करोड़ जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत राज्य में तीव्र कार्य हो रहा है।

250 से अधिक औद्योगिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

इस समिट में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ से आए 250 से अधिक उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने सीआईआई द्वारा आयोजित औद्योगिक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

इस अवसर पर सीआईआई छत्तीसगढ़ के चेयरमैन संजय जैन, को-चेयरमैन सिद्धार्थ अग्रवाल, वाइस चेयरमैन बजरंग गोयल, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव राहुल भगत, और उद्योग सचिव रजत कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।