पाकिस्तान ने 20 दिन बाद छोड़ा BSF जवान, DGMO वार्ता के बाद अटारी बॉर्डर पर भारत को सौंपा

पाकिस्तानी सेना ने चार दिन बाद भी BSF जवान पीके शाह को रिहा नहीं किया, जिससे उनके परिजनों की चिंता बढ़ रही है। बीएसएफ पाक रेंजर्स के साथ फ्लैग मीटिंग के जरिए रिहाई की कोशिश कर रही है, लेकिन भारत-पाक तनाव के कारण देरी हो रही है। पहले दोनों देश फ्लैग मीटिंग के जरिए एक-दूसरे के नागरिकों को रिहा कर देते थे, मगर इस बार पाकिस्तान अड़चन डाल रहा है।

पाकिस्तान ने 20 दिन बाद छोड़ा BSF जवान, DGMO वार्ता के बाद अटारी बॉर्डर पर भारत को सौंपा

पाकिस्तानी जवानो ने चार दिन बीतने के बाद भी BSF जवान PK Shah को रिहा नहीं किया है। उसके परिजन BSF अधिकारियों से संपर्क साध उसकी रिहाई संबंधी पूछ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, BSF पीके शाह की रिहाई के लिए पाक रेंजर्स से फ्लैग मीटिंग करने के प्रयास में लगी है, लेकिन कोई सफलता हाथ लगती नजर नहीं आ रही है। शाह की पत्नी ने कहा कि रिहाई न होने से चिंता बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि अफसरों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है ताकि रिहाई हो सके।

संबंधों की खटास से रिहाई में हो रही देरी

BSF के कुछ जवानों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं दोनों देशों के बीच होती रहती थीं, क्योंकि पंजाब से सटी भारत-पाकिस्तान की सीमा लगभग 553 किलोमीटर लंबी है। BSF व पाक रेंजर्स फ्लैग मीटिंग कर एक-दूसरे के नागरिक छोड़ देते थे। उक्त जवान पहलगाम में हुए आतंकी हमले से दोनों देशों में खराब हुए संबंधों के दौरान पकड़ा गया है, इसलिए उसकी रिहाई में दिक्कत आ रही है।

BSF ने कई बार दिखाई दरियादिली

BSF ने कई बार दरियादिली दिखाई है कि जब कभी पाकिस्तानी नागरिक सीमा लांघ कर भारतीय इलाके में घुस आता था तो BSF उसे पकड़ने के बाद फ्लैग मीटिंग कर उसे पाकिस्तानी रेंजर्सों के हवाले कर देती थी। यह एक ऐसा मामला सामने आया है कि 48 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी पाकिस्तान ने BSF के जवान को फ्लैग मीटिंग करने के बाद भी रिहा नहीं किया है। 

पाकिस्तान की तरफ से नहीं है फेंसिंग

आपको बता दें कि कई बार पाकिस्तानी गांव से बच्चे और लोग गलती से भारत की सीमा में घुस जाते हैं क्योंकि पाकिस्तान की तरफ कोई फेंसिंग नहीं लगी है सिर्फ एक सफेद पिल्लर है वह भी काफी दूरी पर लगे हैं। जबकि इंडिया की तरफ जो फेंसिंग की गई है उस तरफ भी भारत की काफी जमीन है। ऐसे में कई बार पाकिस्तानी ग्रामीण भारत के इलाके में आ जाते थे तो बीएसएफ उन्हें पाकिस्तानी रेंजर्सों को सौंप देती थी।