गाजीपुर में पुलिस अपने ही केस में बनी कमजोर कड़ी, गवाह मुकरते ही पूर्व विधायक समेत 63 आरोपी बरी
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में 13 साल पुराने चर्चित हंसराजपुर पुलिस चौकी तोड़फोड़ और सरकारी वाहन फूंकने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एडीजे कोर्ट ने पूर्व विधायक विजय कुमार और वामपंथी नेता विजय बहादुर सिंह सहित 63 महिला-पुरुष आरोपियों को दोषमुक्त करार दे दिया।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन पुलिसकर्मियों की गवाही के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, वही अदालत में अपने बयान से मुकर गए। आठ पुलिस गवाहों ने आरोपियों की पहचान करने से इनकार कर दिया और कई बयानों में विरोधाभास भी सामने आया। इसका सीधा लाभ बचाव पक्ष को मिला और अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
दरअसल, मामला वर्ष 2013 का है। जंगीपुर थाना क्षेत्र के नसीरपुर गांव में प्रेम प्रसंग से जुड़े एक मामले में पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लिया था। आरोप था कि पुलिस की पिटाई के कारण युवक की मौत हो गई। इस घटना से नाराज ग्रामीणों और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था।
आरोप है कि इसी दौरान हंसराजपुर पुलिस चौकी में तोड़फोड़ की गई और दुल्लहपुर थानाध्यक्ष की सरकारी जीप को आग के हवाले कर दिया गया। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था और मामला लंबे समय तक अदालत में विचाराधीन रहा।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को उम्मीद थी कि पुलिस गवाहों की गवाही से आरोप साबित हो जाएंगे, लेकिन अदालत में गवाहों के बयान बदल जाने और आरोपियों की पहचान न कर पाने के कारण मामला कमजोर पड़ गया। कोर्ट ने साक्ष्यों की कमी और गवाहों के विरोधाभासी बयानों को देखते हुए सभी 63 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार अभियोजन पक्ष इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। इस फैसले ने एक बार फिर आपराधिक मामलों में मजबूत और विश्वसनीय गवाही के महत्व को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
news desk MPcg