RBI की बैठक शुरू, EMI पर सबकी नजर होम लोन सस्ता होगा या बढ़ेगा बोझ
देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन लेने वाले ग्राहकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हुई है। 3 जून से शुरू हुई यह अहम बैठक 5 जून तक चलेगी, जिसके बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे।
इस बार की बैठक को लेकर बाजार, बैंकिंग सेक्टर और आम लोगों में काफी उत्सुकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या RBI ब्याज दरों में कटौती कर लोगों को राहत देगा या फिर बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगाई के दबाव को देखते हुए दरों को स्थिर रखेगा।
क्या घटेगी EMI या बढ़ेगा लोन का बोझ
यदि RBI रेपो रेट में कटौती करता है तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो सकता है, जिसका फायदा ग्राहकों को कम EMI के रूप में मिल सकता है। दूसरी ओर, यदि ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं तो होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की EMI में इजाफा हो सकता है।
हालांकि आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में RBI के सामने विकास दर और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
SBI चेयरमैन ने क्या कहा
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन चेल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने RBI की आगामी नीति को लेकर अपनी राय व्यक्त की है। उनका मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के रुझान को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला कर सकता है।
उनके बयान के बाद बाजार में यह चर्चा और तेज हो गई है कि इस बार RBI दरों में बदलाव करने के बजाय "वेट एंड वॉच" की रणनीति अपना सकता है।
वैश्विक हालात भी बन रहे चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता RBI के फैसले को प्रभावित कर सकती है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। यदि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में तेजी आती है तो महंगाई बढ़ सकती है, जिससे RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।
शेयर बाजार और बैंकिंग सेक्टर की नजर
RBI की नीति का असर सिर्फ लोन धारकों पर ही नहीं बल्कि शेयर बाजार, बैंकिंग सेक्टर और निवेशकों पर भी पड़ता है। रेपो रेट में बदलाव से बैंकिंग शेयरों, रियल एस्टेट सेक्टर और उपभोक्ता मांग पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
इसी वजह से निवेशक और उद्योग जगत भी 5 जून के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं।
5 जून को सुबह 10 बजे होगा ऐलान
अब सभी की निगाहें 5 जून की सुबह 10 बजे पर टिकी हैं, जब RBI गवर्नर मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे। यह फैसला तय करेगा कि आने वाले महीनों में लोगों की EMI कम होगी, स्थिर रहेगी या फिर बढ़ने वाली है।
देश के करोड़ों कर्जधारकों के लिए यह फैसला सीधे उनकी जेब पर असर डाल सकता है, इसलिए RBI की यह बैठक इस साल की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाओं में सेएक मानी जा र ही है।
news desk MPcg