महाकुंभ 2025: आस्था और संस्कृति का संगम , 10 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे प्रयागराज

**प्रयागराज महाकुंभ 2025: चौथे दिन का अद्भुत दृश्य, आस्था और संस्कृति का संगम** महाकुंभ 2025 का चौथा दिन श्रद्धालुओं के उत्साह और संगम के पवित्र स्नान से गूंज उठा है। आस्था और भक्ति से सराबोर यह आयोजन हर दिन नए आयाम छू रहा है। 2025 के पहले चार दिनों में संगम में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 6 करोड़ से अधिक हो गई है। प्रशासन ने बताया कि हर दिन करीब 2 करोड़ लोगों के पहुंचने का अनुमान है। महाकुंभ के प्रति वैश्विक आकर्षण बढ़ता जा रहा है। बुधवार को मेले में 10 देशों से आए 21 प्रतिनिधियों ने शिरकत की। - ये प्रतिनिधि **सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, मॉरीशस, श्रीलंका, फिजी, फिनलैंड, गुयाना, त्रिनिदाद-टोबैगो और यूएई** से पहुंचे हैं। - इन विदेशी मेहमानों ने न केवल संगम में स्नान किया, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिकता का अनुभव भी किया। विशेष तिथियों पर होने वाले शाही स्नान में लाखों श्रद्धालु और साधु-संत हिस्सा ले रहे हैं। - साधु-संतों और धर्मगुरुओं के प्रवचन हो रहे हैं। - भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें विदेशी प्रतिनिधियों ने भी रुचि दिखाई। - श्रद्धालुओं के लिए 100 से अधिक घाट बनाए गए हैं। - सुरक्षा के मद्देनजर 20,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। - मेडिकल कैंप और आपातकालीन सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। - श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने यातायात और लॉजिस्टिक्स पर विशेष ध्यान दिया है। - मेले के हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इस वर्ष का कुंभ न केवल भारतीयों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव बन गया है। विदेशी प्रतिनिधियों ने मेले की भव्यता और भारतीय संस्कृति की सराहना की। - महाकुंभ में अगले कुछ दिनों में प्रमुख स्नान पर्वों पर भीड़ और बढ़ने की उम्मीद है। - विभिन्न देशों से आने वाले प्रतिनिधियों और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। महाकुंभ 2025 भारतीय परंपरा और वैश्विक जुड़ाव का जीवंत उदाहरण बन रहा है। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और मेहमाननवाजी को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है।