मध्य प्रदेश में सामान्य से अधिक वर्षा, ग्वालियर, सागर, इंदौर में तेज बौछारें पड़ने की संभावना
मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय है, जिसके कारण इस वर्ष सामान्य से एक प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। ग्वालियर, सागर, और इंदौर में तेज बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। मानसून द्रोणिका राजस्थान, ग्वालियर, सीधी से ओडिशा होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, गुजरात से लेकर केरल तक अपतटीय द्रोणिका भी सक्रिय है। इन मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है, जिससे मानसून की सक्रियता बरकरार है।
पिछले 24 घंटों में भारी वर्षा :
गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे तक, टीकमगढ़ में 88 मिमी, सागर में 65.2 मिमी, उमरिया में 49.6 मिमी, मलाजखंड में 33.7 मिमी, खरगोन में 24.2 मिमी, मंडला में 24 मिमी, गुना में 23.2 मिमी, जबलपुर में 20.6 मिमी, दमोह में 15 मिमी, खजुराहो में 12.4 मिमी, खंडवा में 10 मिमी, सीधी में 8.6 मिमी, पचमढ़ी में 4.9 मिमी, उज्जैन में 4.6 मिमी, सतना में 4.1 मिमी, रतलाम में 4 मिमी, धार एवं सिवनी में 3.2 मिमी, नर्मदापुरम में 3 मिमी, इंदौर में 2.7 मिमी, रीवा में 2.4 मिमी, रायसेन में 2.2 मिमी, ग्वालियर में 2.1 मिमी, बैतूल में 1 मिमी, और भोपाल में 0.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
मौसम विज्ञानियों का अनुमान :
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी आने के कारण पूरे प्रदेश में हल्की वर्षा होने की संभावना है। ग्वालियर, सागर, और इंदौर संभाग में कहीं-कहीं भारी वर्षा भी हो सकती है। झारखंड पर बना चक्रवात बांग्लादेश की तरफ चला गया है, लेकिन मानसून द्रोणिका के मध्य प्रदेश से गुजरने और अन्य मौसम प्रणालियों के असर से नमी बरकरार है।
मध्य प्रदेश में वर्षा के आँकड़े :
इस सीजन में, एक जून से लेकर 25 जुलाई की सुबह साढ़े आठ बजे तक, मध्य प्रदेश में 386.9 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो सामान्य वर्षा (382.8 मिमी) की तुलना में एक प्रतिशत अधिक है।
इस प्रकार, प्रदेश में मानसून की सक्रियता बरकरार है और आने वाले दिनों में और भी वर्षा की संभावना बनी हुई है।
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