बजट की आय का स्रोत:
आय के बजट में सबसे बड़ा हिस्सा आम लोगों द्वारा दिए जाने वाले इनकम टैक्स से आता है। पिछले बजट में इसमें से हर एक रुपये का 19 पैसा इनकम टैक्स के जरिए आया था। इसके बाद आमदनी माल व सेवा कर, गैस्ट और अन्य करों से 18 पैसे, कंपनी टैक्स से 17 पैसे, और उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क से भी आय जुटाई गई थी। इसके अलावा, ऋण भिन्न प्राप्तियां और अन्य मदों से भी सरकार को आय प्राप्त होती है।
बजट की व्यय स्थिति:
बजट के एक रुपये में से सरकार ने पिछले बजट के अनुसार 20 पैसे ऋणों की अदायगी में खर्च किया था। इसके बाद 20 पैसे करों और शुल्कों में राज्यों की हिस्सेदारी, 16 पैसे केंद्रीय योजनाओं पर, 8 पैसे राज्यों में केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर, 8 पैसे रक्षा, 8 पैसे वित्त आयोग और अन्य अंतरण मदों में, 6 पैसे आर्थिक सहायता में, 4 पैसे पेंशन मद में, और 9 पैसे अन्य व्यय में खर्च किए गए थे।
मंत्रालयों को दी गई राशि:
पिछले बजट में विभिन्न मंत्रालयों को अनुसार निम्नलिखित राशि दी गई थी:
- रक्षा मंत्रालय: 6.2 लाख करोड़ रुपये
- सड़क, राजमार्ग और परिवहन मंत्रालय: 2.78 लाख करोड़ रुपये
- रेल मंत्रालय: 2.55 लाख करोड़ रुपये
- उपभोक्ता मामले मंत्रालय: 2.13 लाख करोड़ रुपये
- गृह मंत्रालय: 2.03 लाख करोड़ रुपये
- ग्रामीण विकास मंत्रालय: 1.77 लाख करोड़ रुपये
- रसायन व उर्वरक मंत्रालय: 1.68 लाख करोड़ रुपये
- संचार मंत्रालय: 1.37 लाख करोड़ रुपये
- कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय: 1.27 लाख करोड़ रुपये
इससे स्पष्ट होता है कि बजट एक विस्तृत प्रक्रिया है जिसमें आय और व्यय का ठीक से प्रबंधन किया जाता है ताकि देश की अर्थव्यवस्था में स्थिरता और विकास हो सके। आने वाले बजट में इसी प्रकार की योजनाओं की अनुमोदना की जानी चाहिए ताकि समाज के हर वर्ग को उपयुक्त लाभ पहुंच सके।