मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज, महेश केवट के राज्यसभा पहुंचने की राह आसान
मध्य प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में ओरछा के महेश केवट का नाम तेजी से चर्चा में है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद यदि कांग्रेस को अदालत से राहत नहीं मिलती, तो महेश केवट के राज्यसभा पहुंचने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। इसके साथ ही वे मध्य प्रदेश से केवट, माझी, मल्लाह, रैकवार और भोई समाज के पहले राज्यसभा सांसद बन सकते हैं।
महेश केवट ओरछा के निवासी और सीमेंट व्यवसायी हैं। वे पहले नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और उनका परिवार लाला हरदौल बैठका की सेवा से भी जुड़ा है। वर्ष 2022 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उनका निष्कासन हुआ था, लेकिन बाद में जांच में रिकॉर्ड नहीं मिलने पर भाजपा ने उनका निष्कासन समाप्त कर दिया।
हाल ही में उन्हें मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया, जिसके बाद उनका राजनीतिक कद और बढ़ा। भाजपा ने सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उन्हें राज्यसभा के लिए आगे बढ़ाया है। माना जा रहा है कि उनकी उम्मीदवारी से मछुआरा और निषाद समाज में बड़ा राजनीतिक संदेश जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी महेश केवट की भूमिका अहम हो सकती है। बुंदेलखंड और यूपी सीमा से जुड़े क्षेत्रों में केवट समाज की मजबूत पकड़ को देखते हुए भाजपा उन्हें संगठन और चुनाव प्रचार में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
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