अभाविप की राष्ट्रीय बैठक में शिक्षा, महिला सुरक्षा और शहरी माओवाद पर 4 बड़े प्रस्ताव पारित
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक में शिक्षा सुधार, महिला सुरक्षा, शहरी माओवाद और वैश्विक परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा के बाद चार अहम प्रस्ताव पारित किए गए। भुवनेश्वर में आयोजित इस राष्ट्रीय बैठक के निर्णयों की जानकारी लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश मंत्री अर्पण कुशवाहा ने दी। उन्होंने बताया कि परिषद आने वाले समय में इन मुद्दों पर देशव्यापी जनजागरण अभियान भी चलाएगी।
अर्पण कुशवाहा ने बताया कि राष्ट्रीय बैठक में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से कई विशेष अभियानों का निर्णय लिया गया है। इनमें 'स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम', 'वंदे मातरम् के 150 वर्ष', आपातकाल विरोध के 50 वर्ष, श्री गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान वर्ष तथा संत रविदास के 650वें प्राकट्योत्सव पर पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बैठक में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। परिषद ने नीट-यूजी, सीयूईटी, सीबीएसई समेत विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। परिषद ने दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पूरी तरह पारदर्शी और फूलप्रूफ परीक्षा प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रेस वार्ता में त्रिभाषा नीति को लेकर भी परिषद का पक्ष सामने आया। अभाविप ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा लागू की जा रही त्रिभाषा नीति का स्वागत करते हुए इसे भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। परिषद ने भारतीय भाषाओं में शोध पत्र लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष पुरस्कार, अनुदान और प्रोत्साहन योजनाएं शुरू करने की मांग भी उठाई।
परिषद ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप, पेटेंट और भारतीय भाषाओं में अकादमिक लेखन को बढ़ावा देने के लिए उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और शोध संगठनों के बीच मजबूत समन्वय विकसित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लंबे समय से रिक्त कुलपति पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने की मांग दोहराते हुए राष्ट्रपति से आवश्यक हस्तक्षेप का आग्रह किया गया।
अभाविप की केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य शीतल कुमारी ने कहा कि नई शिक्षा नीति और त्रिभाषा व्यवस्था भारत की सांस्कृतिक विरासत और भाषाई विविधता को नई मजबूती दे सकती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं में शोध और नवाचार के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
राष्ट्रीय बैठक में पारित प्रस्तावों को शिक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक चेतना के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिषद का कहना है कि इन विषयों पर देशभर में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर युवाओं और विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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