छत्तीसगढ़ के कोरबा में राजस्थान के दलित मजदूरों पर क्रूर अत्याचार, वेतन मांगने पर दी गई अमानवीय यातना

छत्तीसगढ़ के कोरबा में राजस्थान के दो दलित मजदूरों पर वेतन मांगने के लिए क्रूर अत्याचार किए गए, जिसमें बिजली का करंट देना और निजी अंगों पर हमला शामिल है। पुलिस ने पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया और मामला दर्ज कर जांच शुरू की। घटना ने सामाजिक आक्रोश पैदा किया, लोग कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के कोरबा में राजस्थान के दलित मजदूरों पर क्रूर अत्याचार, वेतन मांगने पर दी गई अमानवीय यातना

कोरबा, 19 अप्रैल 2025: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहां राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से आए दो दलित मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। पीड़ितों ने अपने मेहनताने के लिए एडवांस राशि मांगी थी, जिसके जवाब में उन पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर बेरहमी से पिटाई की गई। इतना ही नहीं, उन्हें बिजली का करंट दिया गया, नाखून उखाड़े गए और उनके निजी अंगों पर भी हमला किया गया। इस घटना ने सामाजिक और मानवीय मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पीड़ित अभिषेक भांबी और विनोद कुमार भांबी, जो कि राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कानियां और कालियास गांव के निवासी हैं, 12 फरवरी 2025 को कोरबा में एक आइसक्रीम फैक्ट्री में काम करने के लिए आए थे। जानकारी के अनुसार, छोटू और मुकेश शर्मा नामक व्यक्तियों ने उन्हें काम पर रखा था। पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने अपने वेतन का हिस्सा एडवांस में मांगा, तो फैक्ट्री मालिकों ने उन पर चोरी का इल्जाम लगाया और उनके साथ क्रूरता शुरू कर दी। 

14 अप्रैल को, जब देश भर में अम्बेडकर जयंती मनाई जा रही थी, इन मजदूरों को एक गोदाम में बंद कर यातना दी गई। आरोपियों ने उन्हें निर्वस्त्र किया, बिजली के तारों से करंट के झटके दिए, और प्लायर से उनके नाखून दबाए। पीड़ितों ने बताया कि उनके निजी अंगों को भी निशाना बनाया गया। इस पूरी घटना का वीडियो बनाया गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में पीड़ित अपनी जान की भीख मांगते दिख रहे हैं, जबकि आरोपी उन्हें धमकाते नजर आ रहे हैं।

फिरौती और धमकी

पीड़ितों ने बताया कि आरोपियों ने उनसे 30,000 रुपये की फिरौती मांगी। परिजनों ने किसी तरह 23,950 रुपये का इंतजाम कर भेजा, जिसके बाद उन्हें छोड़ा गया। इसके बाद, 17 अप्रैल को आरोपी पीड़ितों के गांव पहुंचे और उन्हें चुप रहने की धमकी दी। पीड़ितों में से अभिषेक की हालत इतनी खराब थी कि वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गया था।

पुलिस कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित अपने परिजनों के साथ भीलवाड़ा के गुलाबपुरा थाने पहुंचे, जहां उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। चूंकि मामला दूसरे राज्य से संबंधित था, इसलिए गुलाबपुरा पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर मामले को कोरबा पुलिस को स्थानांतरित कर दिया। कोरबा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया है। कोरबा के मुख्य पुलिस अधीक्षक लोभूषण चंद्राकर ने बताया कि सिविल लाइन और रामपुर थाने में गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उनके बयान दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, खपराभट्ठा स्थित आरोपियों की आइसक्रीम फैक्ट्री को नगर निगम की टीम ने सील कर दिया है।

पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी

कोरबा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को प्राथमिकता दी है। हालांकि, पीड़ितों के परिजनों ने भीलवाड़ा पुलिस पर शुरू में समझौते का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। इस मामले में पारदर्शी और त्वरित जांच की जरूरत है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।