अमेरिका-ईरान डील के बाद इजरायल का सख्त रुख, सीमा से सेना हटाने से किया इनकार
अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए कूटनीतिक समझौते के बाद मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। जहां एक ओर इस समझौते को क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, वहीं इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा नीति में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। इजरायल के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश लेबनान सीमा से अपनी सेना नहीं हटाएगा और सुरक्षा से जुड़े फैसले केवल राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे।
अमेरिका-ईरान समझौते पर इजरायल का कड़ा रुख
अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि क्षेत्रीय तनाव कम होगा और सीमा क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां घटेंगी। लेकिन इजरायल ने इस कूटनीतिक पहल से दूरी बनाते हुए संकेत दिया है कि वह अपनी रणनीतिक स्थिति में कोई ढील नहीं देगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि इजरायल अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाता रहेगा और किसी भी बाहरी दबाव में सेना की तैनाती कम नहीं की जाएगी।
लेबनान सीमा पर सेना रहेगी तैनात
इजरायली नेतृत्व का कहना है कि उत्तरी सीमा पर मौजूद सुरक्षा चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। इसी कारण इजरायली रक्षा बल (IDF) लेबनान सीमा सहित संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाए रखेंगे। सरकार का मानना है कि मौजूदा हालात में सैन्य उपस्थिति कम करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
ईरान के किसी भी हमले का मिलेगा जवाब
इजरायल की ओर से यह भी कहा गया कि यदि ईरान या उसके समर्थित समूहों की ओर से किसी प्रकार का हमला होता है, तो उसका पूरी ताकत के साथ जवाब दिया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
मध्य पूर्व में बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद इजरायल के इस सख्त रुख से क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म नहीं होगा। लेबनान, गाजा और सीरिया से जुड़े सुरक्षा मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में हालात और संवेदनशील हो सकते हैं।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर टिकी हुई है। अमेरिका जहां कूटनीतिक समाधान की कोशिश कर रहा है, वहीं इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता केवल राष्ट्रीय सुरक्षा है और इस मुद्दे पर वह किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।
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