जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की भागीदारी: फ्रांस के एवियन पहुंचे, ट्रंप सहित कई वैश्विक नेताओं से करेंगे द्विपक्षीय वार्ता

जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की भागीदारी: फ्रांस के एवियन पहुंचे, ट्रंप सहित कई वैश्विक नेताओं से करेंगे द्विपक्षीय वार्ता

एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को फ्रांस के एवियन शहर पहुंचे, जहां वे जी7 शिखर सम्मेलन 2026 में भाग ले रहे हैं। भारत लगातार 13वीं बार इस सम्मेलन में साझेदार देश के रूप में शामिल हो रहा है, जबकि यह प्रधानमंत्री मोदी की लगातार सातवीं जी7 भागीदारी है।

यह सम्मेलन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर आयोजित किया जा रहा है। इस बैठक में दुनिया की सात सबसे बड़ी उन्नत अर्थव्यवस्थाएं शामिल होती हैं—अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा। यह समूह वैश्विक आर्थिक नीतियों, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर समन्वय और चर्चा के लिए जाना जाता है।

जी7 क्या है और इसका इतिहास

जी7 (Group of Seven) की शुरुआत वर्ष 1975 में हुई थी, जब दुनिया को आर्थिक संकट, तेल संकट और महंगाई जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। शुरुआत में इसे जी6 के रूप में बनाया गया था, जिसमें फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और इटली शामिल थे। बाद में 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह जी7 बन गया।

वर्ष 1998 में रूस को शामिल कर इसे जी8 बनाया गया था, लेकिन 2014 में क्रीमिया संकट के बाद रूस की सदस्यता निलंबित कर दी गई और समूह फिर से जी7 रह गया। वर्तमान में यह समूह वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, हालांकि यह कोई औपचारिक संधि संगठन नहीं है।

वैश्विक साझेदारी और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा

इस बार जी7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी एक विशेष सत्र में हिस्सा लेंगे, जिसका विषय “नई साझेदारियों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को पुनः स्थापित करना” रखा गया है। इस सत्र में जी7 देशों के नेता, साझेदार देश और विश्व बैंक तथा अफ्रीकी विकास बैंक जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

वर्तमान समय में यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दुनिया आपूर्ति श्रृंखला संकट, ऊर्जा संक्रमण, रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव, पश्चिम एशिया तनाव और वैश्विक आर्थिक मंदी जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में जी7 देशों की भूमिका और भी अहम हो जाती है।

द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम

जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इनमें कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान शामिल हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित वार्ता भी शामिल है। व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेताओं की औपचारिक द्विपक्षीय बैठक 17 जून को प्रस्तावित है, जिसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हो सकती है।

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका

भारत लगातार जी7 शिखर सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण साझेदार देश के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। भारत को औपचारिक सदस्य न होने के बावजूद नियमित रूप से आमंत्रित किया जाता है, जो वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती आर्थिक शक्ति और कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।

मोदी-ट्रंप बैठक पर नजर

इस सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की संभावित बैठक को लेकर है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।