अमेरिका ने भारत पर लगाया 10% ‘फोर्स्ड लेबर’ टैरिफ, सेक्शन 301 जांच के बाद बड़ा फैसला; व्यापार वार्ता पर बढ़ा दबाव
अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 10% ‘फोर्स्ड लेबर’ (Forced Labour) टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी ट्रेड एक्ट, 1974 की सेक्शन 301 के तहत कई महीनों तक चली जांच के बाद लिया गया। पहले भारत पर 12.5% टैरिफ लगाए जाने का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम निर्णय में इसे घटाकर 10% कर दिया गया।
इस फैसले के साथ भारत को पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों की श्रेणी में रखा गया है। अमेरिका का कहना है कि जिन देशों ने जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात को रोकने और उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए, उन पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।
क्या है अमेरिका का नया फैसला?
अमेरिकी प्रशासन ने गुरुवार को घोषणा की कि भारत सहित 60 देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। इन देशों का अमेरिका के कुल आयात में 99% से अधिक हिस्सा है। यह नया शुल्क फरवरी में लागू किए गए अस्थायी 10% ग्लोबल टैरिफ की जगह लेगा, जिसकी अवधि अब समाप्त हो चुकी है।
यह कार्रवाई Section 301 Investigation के निष्कर्षों के आधार पर की गई है। इस कानून के तहत अमेरिका उन देशों पर व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है, जिन पर अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापारिक व्यवहार का आरोप हो।
अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने कहा कि यह कदम केवल व्यापारिक संतुलन के लिए नहीं, बल्कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जिन देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं, उनका स्वागत किया जाता है। साथ ही अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि इन नियमों का प्रभावी ढंग से पालन भी हो।
भारत के लिए राहत भी, चिंता भी
हालांकि भारत पर प्रस्तावित 12.5% की जगह 10% टैरिफ लगाया गया है, जिसे आंशिक राहत माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।
भारत के निर्यातक अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर टैरिफ का सामना करेंगे। इससे अमेरिका के बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कम हो सकती है।
अभी एक और सेक्शन 301 जांच जारी
भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि अमेरिका ने एक दूसरी सेक्शन 301 जांच भी शुरू कर रखी है। यह जांच भारत की कथित अत्यधिक विनिर्माण क्षमता (Excess Manufacturing Capacity) से जुड़ी है।
यदि इस जांच के बाद भी अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाते हैं, तो भारतीय निर्यात पर और अधिक दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों पर फिलहाल केवल Forced Labour जांच लागू है।
भारत ने जांच के दौरान क्या दलील दी?
जांच के दौरान भारत सरकार और उद्योग संगठनों ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा। भारत ने कहा कि देश के संविधान में जबरन श्रम पर स्पष्ट प्रतिबंध है और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद हैं।
भारतीय पक्ष का तर्क था कि भारत जबरन श्रम को बढ़ावा नहीं देता और इस आधार पर अतिरिक्त व्यापारिक प्रतिबंध उचित नहीं हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या असर पड़ेगा?
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
फरवरी में दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक समझ बनी थी, जिसके तहत भारतीय निर्यात पर लागू कुल 50% टैरिफ को घटाकर 18% करने का प्रस्ताव था। इस 50% में रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया 25% दंडात्मक शुल्क भी शामिल था।
इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदने और अमेरिकी कृषि समेत कई क्षेत्रों को अधिक बाजार पहुंच देने का प्रस्ताव रखा था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी अनिश्चितता
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बीच एक और घटनाक्रम सामने आया। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए वैश्विक Reciprocal Tariffs को रद्द कर दिया।
इस फैसले के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि भारत के साथ प्रस्तावित 18% टैरिफ व्यवस्था किस रूप में लागू होगी। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता में नई जटिलताएं पैदा हो गई हैं।
पीयूष गोयल ने क्या कहा था?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि भारत ने 18% टैरिफ प्रस्ताव इसलिए स्वीकार किया क्योंकि इससे भारत को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति मिल सकती थी।
लेकिन अब 10% Forced Labour टैरिफ लागू होने और दूसरी सेक्शन 301 जांच जारी रहने से भारत की यह रणनीतिक बढ़त प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय
एशिया ग्रुप के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि मार्क लिन्सकॉट का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की अधिकांश शर्तों पर सहमति बन चुकी है।
हालांकि सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि भारत चाहता है कि उसे अमेरिका की ओर से अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम या अधिक अनुकूल टैरिफ का स्पष्ट आश्वासन मिले।
उनका कहना है कि यदि पाकिस्तान, श्रीलंका और फिलीपींस जैसे देशों पर केवल एक जांच लागू होती है और भारत पर दो अलग-अलग जांचों के आधार पर अधिक कुल टैरिफ लगता है, तो भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
भारतीय उद्योगों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अतिरिक्त टैरिफ लंबे समय तक लागू रहता है, तो भारत के टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, इंजीनियरिंग उत्पाद, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, कृषि उत्पाद और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ सकता है।
इन क्षेत्रों की बड़ी मात्रा में अमेरिका को निर्यात होती है। अतिरिक्त शुल्क लगने से भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं, जिससे अमेरिकी बाजार में उनकी मांग और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की आशंका है।
आगे क्या?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अभी जारी है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर अंतिम निर्णय हो सकता है। साथ ही भारत पर चल रही दूसरी Section 301 जांच के नतीजे भी बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
यदि दूसरी जांच के बाद अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाते हैं, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिका का बाजार और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं यदि दोनों देश व्यापक व्यापार समझौते पर सहमत हो जाते हैं, तो मौजूदा टैरिफ व्यवस्था में बदलाव की संभावना भी बनी रहेगी।
news desk MPcg