ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड का खुलासा: 7.40 करोड़ की ठगी में हाथरस पुलिस ने 4 आरोपी पकड़े

ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड का खुलासा: 7.40 करोड़ की ठगी में हाथरस पुलिस ने 4 आरोपी पकड़े

हाथरस, उत्तर प्रदेश | 22 जुलाई 2026

हाथरस पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर की जा रही करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले का खुलासा किया है। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 7.40 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े म्यूल अकाउंट नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर फंसाते थे। इसके बाद ठगी की रकम को सीधे अपने खातों में लेने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे, ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके।

ऑपरेशन वज्र में मिली सफलता

हाथरस पुलिस ने यह कार्रवाई ऑपरेशन वज्र के तहत की। अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान कई संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी सामने आई।

जांच में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक खाते से कई राज्यों में दर्ज साइबर ठगी के मामलों का कनेक्शन मिला। पुलिस को पता चला कि इस खाते में देश के अलग-अलग हिस्सों से साइबर अपराध की रकम भेजी गई थी।

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में:

तमिलनाडु,
तेलंगाना,
उत्तर प्रदेश,
बिहार,
मध्य प्रदेश

समेत कई राज्यों के साइबर फ्रॉड मामलों के लिंक मिले हैं।

सात मामलों में 7.40 करोड़ की ठगी

पुलिस जांच में सामने आया कि सात अलग-अलग साइबर अपराध मामलों में कुल 7.40 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी।

इन मामलों में ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा हाथरस के म्यूल बैंक खाते में पहुंचा था। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि करीब 80.88 लाख रुपये इसी खाते में ट्रांसफर किए गए थे।

इसके बाद पुलिस ने बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, जीएसटी रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच शुरू की।

म्यूल खातों से छिपाते थे रकम

पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगों का यह गिरोह खुद के बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करता था। आरोपी आम लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे।

इन खातों का इस्तेमाल:

साइबर ठगी की रकम जमा करने,
पैसे को दूसरे खातों में भेजने,
लेनदेन की पहचान छिपाने

के लिए किया जाता था।

पुलिस ने बताया कि ऐसे खातों को साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

खाता खुलवाने के बदले देते थे पैसे

पूछताछ में मुख्य आरोपी मनीष गौतम ने पुलिस को बताया कि वह लोगों को आर्थिक लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था।

पुलिस के अनुसार, आरोपी:

चालू बैंक खाते खुलवाते थे।
फर्जी फर्म तैयार करते थे।
जीएसटी पंजीकरण कराते थे।
बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी अलग-अलग लोगों के नाम से दर्ज कराते थे।

आरोपियों को प्रत्येक खाते के बदले करीब 2 लाख रुपये तक मिलते थे, जबकि खाता उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को लगभग 20 हजार रुपये दिए जाते थे।

सोशल मीडिया से बनाते थे शिकार

जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों से संपर्क करते थे।

वे निवेशकों को:

शेयर मार्केट ट्रेडिंग,
ऑनलाइन निवेश,
कम समय में ज्यादा रिटर्न

जैसे झांसे देते थे।

शुरुआत में छोटे निवेश पर लाभ दिखाकर लोगों का भरोसा जीता जाता था। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराने के बाद पैसे निकालने के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की मांग की जाती थी।

जब पीड़ित अधिक पैसे जमा कर देते थे, तो आरोपी संपर्क बंद कर देते थे।

चार आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान:

सत्यवीर सिंह
निवासी छीतीपुर, थाना हसायन

अर्जुन सिंह
निवासी पोरा, थाना सिकंदराराऊ

मनीष गौतम
निवासी पोरा, थाना सिकंदराराऊ

आकाश कुमार
निवासी इटरनी गढ़ोला, थाना सिकंदराराऊ

के रूप में हुई है।

अन्य सदस्यों की तलाश जारी

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ में गिरोह से जुड़े कई अन्य बैंक खातों और लोगों की जानकारी मिली है।

अब पुलिस:

संदिग्ध बैंक खातों की जांच कर रही है।
साइबर ठगी की पूरी रकम की ट्रेल खंगाल रही है।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर बढ़ रही ठगी से बचने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

लोगों को सलाह दी गई है कि:

सोशल मीडिया पर मिलने वाले निवेश ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें।
ज्यादा मुनाफे के दावों से सावधान रहें।
किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक खाते या निजी जानकारी उपलब्ध न कराएं।
निवेश से पहले कंपनी और प्लेटफॉर्म की जांच जरूर करें।

साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

साइबर अपराधियों पर शिकंजा

हाथरस पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे गिरोहों के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है, जो म्यूल खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम को छिपाने का काम करते हैं।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि देशभर में फैले साइबर अपराध के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।