रायबरेली सीवर परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल, PMO ने मांगी रिपोर्ट; 150 करोड़ की योजना में घटिया सामग्री के आरोपों की जांच शुरू
रायबरेली शहर में करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से चल रही सीवर लाइन परियोजना अब जांच के दायरे में आ गई है। निर्माण कार्य में कथित तौर पर घटिया सामग्री और मानकों के विपरीत पाइप इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बाद मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गया है। शिकायत के संज्ञान में आने के बाद पीएमओ ने संबंधित विभाग से रिपोर्ट तलब की है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश जल निगम ने विभागीय जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच तकनीकी मानकों के आधार पर की जाएगी और यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता या गुणवत्ता से समझौता पाया गया तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
150 करोड़ रुपये की परियोजना पर उठे गुणवत्ता संबंधी सवाल
रायबरेली नगर पालिका क्षेत्र में सीवर नेटवर्क के विस्तार और आधुनिक सीवरेज व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से यह परियोजना संचालित की जा रही है। इसके तहत शहर के विभिन्न वार्डों में भूमिगत सीवर पाइपलाइन बिछाई जा रही है ताकि भविष्य में जल निकासी व्यवस्था बेहतर हो सके और सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सके।
हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप लगाया गया कि परियोजना में उपयोग की जा रही पाइप निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हैं और कई स्थानों पर घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भाजपा नेता और सभासद ने प्रधानमंत्री को भेजी शिकायत
मामले में भाजपा नेता एवं सभासद धर्मेंद्र द्विवेदी ने 25 जून 2026 को प्रधानमंत्री को विस्तृत शिकायत भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सीवर लाइन निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है तथा ऐसी पाइपों का उपयोग किया जा रहा है जो निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप नहीं हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं हुई तो भविष्य में पूरी सीवर व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और करोड़ों रुपये की सार्वजनिक परियोजना की उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
PMO ने मांगी रिपोर्ट, विभाग ने शुरू की जांच
शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद पीएमओ ने संबंधित विभाग से मामले की रिपोर्ट मांगी। इसके बाद जल निगम ने परियोजना की तकनीकी जांच शुरू करने का निर्णय लिया।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जांच टीम निर्माणाधीन सीवर लाइन, उपयोग की जा रही पाइप, निर्माण सामग्री, कार्यप्रणाली और निर्धारित तकनीकी मानकों का परीक्षण करेगी। आवश्यकता पड़ने पर सामग्री के नमूने भी परीक्षण के लिए भेजे जा सकते हैं।
किन बिंदुओं पर होगी जांच
जल निगम की जांच टीम कई महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिनमें शामिल हैं—
सीवर पाइप की गुणवत्ता और मजबूती।
पाइप का निर्धारित व्यास एवं तकनीकी विनिर्देश।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता।
कार्य की तकनीकी स्वीकृति के अनुरूप निष्पादन।
ठेकेदार द्वारा अनुबंध की शर्तों का पालन।
गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया का अनुपालन।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और तकनीकी कार्रवाई तय की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने भी जताई चिंता
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रारंभिक निर्माण चरण में ही गुणवत्ता से समझौता किया गया तो भविष्य में बार-बार सड़कें खोदनी पड़ सकती हैं और सीवर जाम, रिसाव तथा जलभराव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
मोहल्लों के कई लोगों ने शिकायतकर्ता के साथ मिलकर स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग भी उठाई है ताकि परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
जल निगम का बयान
जल निगम के अधिशासी अभियंता अफजल ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद विभाग ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह तकनीकी मानकों के आधार पर की जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा और जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
सीवर परियोजना का उद्देश्य
रायबरेली शहर में यह परियोजना शहरी सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है। इसके माध्यम से—
घरों को आधुनिक सीवर नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
खुले नालों और प्रदूषण की समस्या कम होगी।
जलभराव की स्थिति में सुधार आएगा।
पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सीवेज सिस्टम विकसित किया जाएगा।
ऐसी स्थिति में परियोजना की गुणवत्ता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल मामले की जांच जारी है और विभाग ने किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तकनीकी परीक्षण पूरा करने की बात कही है। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी अथवा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुबंध की शर्तों और विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले पर अब स्थानीय प्रशासन, जल निगम और प्रधानमंत्री कार्यालय की निगाह बनी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि निर्माण कार्य में वास्तव में गुणवत्ता संबंधी अनियमितताएं हुई हैं या नहीं। फिलहाल विभाग ने निष्पक्ष और तकनीकी जांच का आश्वासन दिया है।
news desk MPcg