शर्त के साथ अनशन खत्म करेंगे सोनम वांगचुक, सरकार को लिखा पत्र
लगातार जारी आंदोलन और आमरण अनशन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अपना अनशन समाप्त करने की इच्छा जताई है। हालांकि उन्होंने इसके लिए एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है। वांगचुक ने कहा है कि यदि सरकार स्पष्ट और भरोसेमंद आश्वासन देती है कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।
यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न संगठनों का प्रदर्शन लगातार जारी है। हाल के दिनों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, हिरासत और लाठीचार्ज को लेकर विवाद भी गहराया है।
सरकार को लिखे पत्र में क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को संबोधित पत्र में लिखा कि उनका उद्देश्य किसी टकराव को बढ़ाना नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं के भविष्य की रक्षा करना है।
उन्होंने लिखा,
"मैं सरकार से सम्मानपूर्वक यह स्पष्ट आश्वासन चाहता हूं कि इस आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी को किसी दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनका एकमात्र अपराध एक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग करना है।"
वांगचुक ने आगे कहा कि यदि सरकार ऐसा भरोसा देती है तो वह इस विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त करेंगे कि सरकार ने केवल उनकी नहीं, बल्कि देशभर के लाखों युवाओं की भावनाओं को भी समझा है।
अनशन खत्म करने का फैसला सरकार के जवाब पर निर्भर
वांगचुक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उनका अनशन व्यक्तिगत मांगों के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल युवाओं को किसी प्रकार के कानूनी प्रतिशोध का सामना नहीं करना चाहिए।
इसलिए फिलहाल उनका अनशन समाप्त होगा या नहीं, यह पूरी तरह सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुधवार को भी हजारों छात्र और प्रदर्शनकारी जुटे रहे। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शन जारी रहा। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शन स्थल पर विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई विपक्षी नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मंच पर संविधान की प्रति, चरखा, धार्मिक ग्रंथ और महात्मा गांधी से जुड़े प्रतीक भी रखे गए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए अहम निर्देश
इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट में पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। अदालत ने सरकार और पुलिस को निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया गया, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई थी।
मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं सोनम वांगचुक
अनशन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद सोनम वांगचुक को पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी।
आंदोलन की मुख्य मांगें
आंदोलनकारी और छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और कानूनी कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों को प्रताड़ित न किया जाए।
शिक्षा व्यवस्था में व्यापक संस्थागत सुधार किए जाएं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
वांगचुक के पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और किसी भी मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि सरकार आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट आश्वासन देती है, तो सोनम वांगचुक अपना आमरण अनशन समाप्त कर सकते हैं। वहीं यदि ऐसा नहीं होता, तो आंदोलन और आगे बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
news desk MPcg