देशभर में मानसून का कहर: सामान्य से 170-180% अधिक बारिश, गुजरात-महाराष्ट्र में बाढ़, कई राज्यों में रेड अलर्ट
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के कई हिस्सों में बेहद सक्रिय रूप धारण कर लिया है। पिछले दो दिनों में देश के अनेक राज्यों में सामान्य से 170-180 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिसके चलते गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, बिहार और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में बाढ़, जलभराव, भूस्खलन और यातायात बाधित होने जैसी स्थिति बन गई है। सबसे गंभीर हालात गुजरात के दक्षिणी जिलों और महाराष्ट्र के पालघर में हैं, जहां हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने तथा मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) के सक्रिय रहने के कारण अगले 48 घंटों तक उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है।
गुजरात में सबसे गंभीर स्थिति, उमरगाम में रिकॉर्ड बारिश
इस समय सबसे अधिक प्रभावित राज्य गुजरात है। दक्षिण गुजरात के वलसाड जिले के उमरगाम तालुका में पिछले 24 घंटों के दौरान लगभग 43 इंच (करीब 1,090 मिमी) बारिश दर्ज की गई, जिससे कई निचले इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए।
सूरत, वापी, धरमपुर, कपराडा, नानापोधा और तापी जिले के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश से नदियां उफान पर हैं। भेड़ावल और सीमादा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण आसपास की कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी भर गया।
प्रशासन के अनुसार—
2,244 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
वलसाड जिले में राहत कार्यों के लिए 3 NDRF और 5 SDRF टीमें पहले से तैनात हैं।
नई दिल्ली से 2 अतिरिक्त NDRF टीमें भेजी जा रही हैं।
भारतीय सेना की लगभग 70 जवानों की टुकड़ी तथा पांच नावों को भी राहत कार्यों में लगाया जा रहा है।
फायर विभाग की विशेष टीम भी जिला प्रशासन के साथ मिलकर अभियान चला रही है।
गुजरात सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है।
महाराष्ट्र के पालघर में बाढ़ जैसे हालात
गुजरात से सटे महाराष्ट्र के पालघर जिले में भी लगातार बारिश ने हालात गंभीर कर दिए हैं।
विशेष रूप से दहानू और तलासरी तहसीलों में कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट गया है। निचले इलाकों में पानी भरने के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार—
891 लोगों (218 परिवारों) को सुरक्षित निकाला गया।
लगभग दो लाख उपभोक्ता बिजली आपूर्ति बाधित होने से प्रभावित हैं।
जिले के सभी स्कूल और कॉलेज एहतियातन बंद कर दिए गए हैं।
प्रशासन लगातार जलस्तर और नदी प्रवाह की निगरानी कर रहा है।
रेलवे सेवाओं पर बड़ा असर, वंदे भारत सहित कई ट्रेनें रद्द
भारी बारिश का असर पश्चिम रेलवे नेटवर्क पर भी पड़ा है।
घोलवड़ और उमरगाम स्टेशनों के बीच रेलवे पुल संख्या 203 पर जलस्तर बढ़ने के कारण रेल यातायात अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।
इसके चलते कई प्रमुख ट्रेनें रद्द की गईं, जिनमें शामिल हैं—
मुंबई सेंट्रल–अहमदाबाद गुजरात सुपरफास्ट एक्सप्रेस
मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस
मुंबई सेंट्रल–अहमदाबाद शताब्दी एक्सप्रेस
रेलवे ने यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचने की अपील की है।
भारत से दक्षिण कोरिया तक फैली बादलों की विशाल बेल्ट
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार की भारी बारिश के पीछे एक असामान्य मौसमीय संरचना जिम्मेदार है।
नवीनतम उपग्रह चित्रों में भारत के हिमालयी क्षेत्र से लेकर दक्षिण कोरिया तक लगभग 7,000 से 10,000 किलोमीटर लंबी बादलों की पट्टी दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञ इसे मानसून कन्वर्जेंस जोन (Monsoon Convergence Zone) से जोड़ रहे हैं।
यह स्थिति तब बनी जब—
हिंद महासागर और अरब सागर से अत्यधिक नमी वाली हवाएं लगातार उत्तर और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ीं।
बंगाल की खाड़ी से भी नमी का प्रवाह बना रहा।
मानसून ट्रफ सामान्य स्थिति से अधिक सक्रिय रही।
पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय प्रणालियों ने वर्षा की तीव्रता को और बढ़ा दिया।
इसी वजह से मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में लगभग 60 घंटे से लगातार वर्षा हो रही है।
उत्तर प्रदेश में 69 जिलों में अलर्ट
उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग ने 69 जिलों में वर्षा का अलर्ट जारी किया है।
इनमें 18 जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
लगातार बारिश से—
गंगा, घाघरा, शारदा, राप्ती सहित कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है।
नदी किनारे बसे गांवों में पानी घुस गया है।
कई ग्रामीण सड़कें जलमग्न हो गई हैं।
खेतों में जलभराव बढ़ने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
राजस्थान में मानसून सबसे सक्रिय दौर में
राजस्थान में भी इस मानसून की सबसे तेज बारिश दर्ज की गई।
ब्यावर में एक ही दिन में लगभग 9 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि चित्तौड़गढ़, कोटा, उदयपुर और आसपास के जिलों में भी लगातार बारिश जारी है।
पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में बिजली गिरने और भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है।
मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश का दौर जारी
मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है।
भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल, इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जिलों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है।
नदियों और बांधों का जलस्तर बढ़ने के कारण प्रशासन निगरानी बनाए हुए है।
मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है।
छत्तीसगढ़ में बांधों के गेट खोले गए
लगातार वर्षा के चलते कोरबा स्थित मिनीमाता बांगो बांध के कई गेट खोल दिए गए हैं।
राज्य के मध्य और उत्तरी जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी है।
प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन का खतरा
हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं।
बिलासपुर-सोलन सीमा पर पहाड़ी का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग पर गिर गया, जिससे यातायात बाधित हुआ।
शिमला में एक विशाल पेड़ मकान की छत पर गिर गया।
उधर जम्मू-कश्मीर में चिनाब और तवी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
जम्मू पुलिस और SDRF ने तवी नदी में फंसे दो लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू भी किया।
असम में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित
पूर्वोत्तर भारत में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
असम में बाढ़ से लगभग 6.53 लाख लोग प्रभावित बताए गए हैं।
पिछले 24 घंटों में 10 लोगों की मौत हुई है, जबकि इस वर्ष बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या 41 तक पहुंच गई है।
अगले दो दिनों का मौसम पूर्वानुमान
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार—
24 जुलाई
मध्य महाराष्ट्र में ऑरेंज अलर्ट।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारी बारिश।
पूर्वी राजस्थान में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना।
बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में येलो अलर्ट।
25 जुलाई
मध्य प्रदेश, पश्चिम राजस्थान, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट।
छत्तीसगढ़ और पूर्वी राजस्थान में बिजली गिरने की चेतावनी।
कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश जारी रहने की संभावना।
आखिर इतनी भारी बारिश क्यों हो रही है?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार की बारिश कई मौसमीय प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने का परिणाम है।
मुख्य कारणों में शामिल हैं—
सक्रिय मानसून ट्रफ।
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी की आपूर्ति।
निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) का प्रभाव।
मानसून कन्वर्जेंस जोन का मजबूत होना।
पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय संवहनीय गतिविधियों (Convective Activity) का सहयोग।
इन सभी कारणों से देश के बड़े हिस्से में वर्षा सामान्य से काफी अधिक दर्ज की जा रही है।
प्रशासन की अपील
राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि—
जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचें।
नदी, नालों और पुलों के पास जाने से परहेज करें।
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें।
यात्रा से पहले सड़क और रेल सेवाओं की स्थिति की जानकारी अवश्य लें।
आपात स्थिति में NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन के हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करें।
निष्कर्ष
देश में मानसून फिलहाल अपने सबसे सक्रिय चरण में है। गुजरात और महाराष्ट्र में बाढ़, उत्तर और मध्य भारत में लगातार वर्षा, पूर्वोत्तर में बाढ़ तथा हिमालयी राज्यों में भूस्खलन का खतरा यह संकेत देता है कि आने वाले 48 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण रहेंगे। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, इसलिए प्रशासनिक सतर्कता और नागरिकों की सावधानी दोनों ही बेहद आवश्यक हैं।
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