गुजरात ATS का बड़ा खुलासा: नफरती ऑनलाइन कंटेंट से कट्टरपंथ की राह पर चले पांच युवा, 8 बार किया था धमाके का ट्रायल

गुजरात ATS का बड़ा खुलासा: नफरती ऑनलाइन कंटेंट से कट्टरपंथ की राह पर चले पांच युवा, 8 बार किया था धमाके का ट्रायल

गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने जैश-ए-मोहम्मद से प्रेरित कथित कट्टरपंथी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पांच युवाओं को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, ये आरोपी किसी विदेशी हैंडलर के सीधे संपर्क में होने के बजाय कथित तौर पर इंटरनेट पर मौजूद नफरती सामग्री, वीडियो और कट्टरपंथी साहित्य से प्रभावित होकर आतंकी गतिविधियों की ओर बढ़े।

गुजरात ATS की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर IED और टाइमर बम बनाने की कोशिश की थी और करीब आठ बार धमाके का ट्रायल किया था। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क के डिजिटल कनेक्शन और अन्य संभावित सदस्यों की भूमिका की जांच कर रही है।

जैश-प्रेरित नेटवर्क का खुलासा

गुजरात ATS के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपी जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा से प्रभावित बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन युवाओं ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए कट्टरपंथी सामग्री तक पहुंच बनाई और धीरे-धीरे हिंसक गतिविधियों की ओर बढ़े।

ATS की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी किसी बड़े विदेशी आतंकी संगठन के निर्देश पर काम कर रहे थे या नहीं, इसकी जांच अभी जारी है। हालांकि अब तक मिले सबूतों के आधार पर एजेंसी का कहना है कि कट्टरपंथ की शुरुआत ऑनलाइन सामग्री और डिजिटल माध्यमों से हुई।

इंटरनेट और सोशल मीडिया से प्रभावित होने का दावा

जांच में सामने आया है कि आरोपी इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री देखते और पढ़ते थे।

ATS अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के पास से कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ी किताबें, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री मिली है। इनमें जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर से जुड़ी सामग्री भी शामिल होने की बात कही गई है।

गुजरात ATS के अधिकारियों का कहना है कि ऐसी सामग्री युवाओं को भ्रमित कर हिंसक गतिविधियों की ओर धकेल सकती है।

मदरसों से जुड़े युवाओं की जांच

जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी पालनपुर और भरूच के मदरसों से जुड़े हुए थे। हालांकि ATS इस बात की भी जांच कर रही है कि इन संस्थानों की भूमिका क्या थी और क्या किसी अन्य व्यक्ति या संगठन का इन गतिविधियों से संबंध था।

अधिकारियों का कहना है कि केवल किसी संस्था से जुड़ाव के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता और मामले की जांच तथ्यों व डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

2023 से 2024 के बीच किए ट्रायल का दावा

ATS की जांच के मुताबिक, मुख्य आरोपी अमद जामिया अबुल हसन और उसके साथियों ने कथित तौर पर वर्ष 2023 से फरवरी 2024 के बीच कई बार विस्फोटक उपकरणों का परीक्षण किया।

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने IED और टाइमर आधारित बम बनाने की कोशिश की थी। एजेंसी के मुताबिक, इन परीक्षणों का उद्देश्य विस्फोटक तकनीक को समझना और उसका प्रयोग करना था।

ऑनलाइन शॉपिंग से मंगाया सामान

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर इंटरनेट के जरिए बम बनाने से जुड़ी जानकारी हासिल की और इसके लिए जरूरी सामान ऑनलाइन माध्यमों से मंगाने की कोशिश की।

ATS ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से करीब 1.30 लाख रुपये नकद और कथित रूप से विस्फोटक सामग्री बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान बरामद करने का दावा किया है।

बरामद सामान और डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

डिजिटल सबूत जुटा रही ATS

मामले की गहराई से जांच के लिए गुजरात ATS डिजिटल सबूत जुटा रही है। जांच एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से भी जानकारी मांगी है।

ATS इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आरोपियों की गतिविधियों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे किन लोगों के संपर्क में थे और किस तरह की सामग्री साझा कर रहे थे।

UAPA समेत कई धाराओं में मामला दर्ज

यह कार्रवाई वर्ष 2024 में दर्ज एक FIR से जुड़ी है। मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

गुजरात ATS राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

आगे की जांच जारी

फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। ATS यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का विस्तार कितना था, क्या इसमें और लोग शामिल हैं और क्या किसी बाहरी संगठन से इनका संपर्क था।

जांच एजेंसी का कहना है कि डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।