सोनभद्र में करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा: संदिग्ध बैंक खातों पर पुलिस का बड़ा एक्शन, चार मुकदमे दर्ज; IT एक्ट के तहत जांच तेज

सोनभद्र में करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा: संदिग्ध बैंक खातों पर पुलिस का बड़ा एक्शन, चार मुकदमे दर्ज; IT एक्ट के तहत जांच तेज

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में करोड़ों रुपये की कथित साइबर ठगी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं। जांच के दौरान ऐसे कई बैंक खाते सामने आए हैं, जिनका इस्तेमाल देशभर में साइबर अपराध से ठगी गई रकम को ट्रांसफर और निकालने के लिए किए जाने की आशंका है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत मामले दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ बैंक खातों में विभिन्न राज्यों से साइबर धोखाधड़ी के जरिए प्राप्त धनराशि जमा की गई थी। पुलिस अब इन खातों के संचालकों, लेनदेन की श्रृंखला और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।

ऑपरेशन 'साइ-वज्र' के दौरान सामने आया मामला

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और प्रतिबिंब पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान सामने आई। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन साइ-वज्र' के तहत पिपरी थाना क्षेत्र में साइबर सेल ने संदिग्ध बैंक खातों की जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान पुलिस को ऐसे खाते मिले जिनमें देश के विभिन्न हिस्सों में साइबर ठगी से पीड़ित लोगों की रकम ट्रांसफर होने के संकेत मिले। इसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई और संबंधित खातों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए।

पिपरी थाने में तीन, राबर्ट्सगंज में एक मामला दर्ज

पुलिस ने पिपरी थाना क्षेत्र में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं। इन मामलों में करीब 8.54 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा राबर्ट्सगंज कोतवाली में मिर्जापुर साइबर क्राइम थाने से स्थानांतरित जीरो एफआईआर के आधार पर एक अन्य मामला दर्ज किया गया है।

चारों मामलों की जांच अलग-अलग स्तर पर की जा रही है और संबंधित बैंक खातों के दस्तावेज, केवाईसी रिकॉर्ड तथा डिजिटल ट्रांजैक्शन की पड़ताल की जा रही है।

कई खातों में मिली संदिग्ध रकम

जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे खाते मिले जिनमें साइबर ठगी से जुड़ी रकम जमा होने के प्रमाण मिले।

पहले खाते के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर सात शिकायतें दर्ज थीं। जांच में लगभग 88,040 रुपये की संदिग्ध राशि जमा होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने खाताधारक को प्रथम स्तर का लाभार्थी (First Layer Beneficiary) माना है।
दूसरे संदिग्ध खाते में एक शिकायत के आधार पर 5,13,500 रुपये की संदिग्ध राशि ट्रांसफर होने का पता चला।
तीसरे खाते में तीन अलग-अलग शिकायतों के आधार पर लगभग 2,52,860 रुपये जमा होने की जानकारी मिली।

पुलिस का कहना है कि ये रकम विभिन्न साइबर अपराधों के जरिए ठगे गए पैसों का हिस्सा हो सकती है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

'म्यूल अकाउंट' नेटवर्क की जांच

पुलिस की जांच का केंद्र तथाकथित म्यूल अकाउंट (Mule Accounts) हैं। साइबर अपराध में ऐसे बैंक खातों का उपयोग ठगी की रकम को कई चरणों में ट्रांसफर कर मूल स्रोत छिपाने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारकों को मामूली कमीशन देकर उनके नाम पर खाते संचालित किए जाते हैं, जबकि वास्तविक अपराधी पर्दे के पीछे रहते हैं।

सोनभद्र पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित खाताधारकों की भूमिका केवल खाता उपलब्ध कराने तक सीमित थी या वे पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा थे।

एसपी ने गठित की विशेष जांच टीम

पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्किल स्तर पर विशेष जांच टीम गठित की है। टीम बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, आधार विवरण, आईपी एड्रेस, डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म और धन के प्रवाह (Money Trail) की तकनीकी जांच कर रही है।

साइबर सेल के अधिकारी विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ भी समन्वय स्थापित कर रहे हैं ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान की जा सके।

पहले ही गिरफ्तार हो चुका है एक आरोपी

जांच के दौरान सामने आए एक मामले में नीलू इंटरप्राइजेज के नाम से संचालित बैंक खाते का भी उल्लेख है। इस खाते के खिलाफ भी साइबर ठगी से संबंधित कई शिकायतें दर्ज हैं।

पुलिस के अनुसार इस फर्म के प्रोपराइटर मृत्युंजय देव पांडेय को पहले ही दूसरे राज्य की पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस खाते के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ और किन-किन साइबर अपराधों से इसका संबंध है।

कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं तार

प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि संदिग्ध बैंक खातों का इस्तेमाल केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। इन खातों में विभिन्न राज्यों से साइबर ठगी की रकम आने के संकेत मिले हैं। इसी कारण पुलिस अब इंटर-स्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क की संभावना को भी ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित साइबर गिरोह पहले फर्जी या किराये के बैंक खाते खुलवाते हैं, फिर ऑनलाइन निवेश, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कस्टमर केयर, पार्ट-टाइम जॉब, लोन और KYC अपडेट जैसे साइबर फ्रॉड के जरिए लोगों से ठगी गई रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर करते हैं।

पुलिस की अपील

सोनभद्र पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा किसी अन्य को उपलब्ध न कराएं। ऐसा करना अनजाने में भी व्यक्ति को साइबर अपराध की जांच के दायरे में ला सकता है।

पुलिस ने यह भी कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि को फ्रीज कराने की कार्रवाई की जा सके।

फिलहाल चारों मामलों में जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया जा सकेगा।