कनाडा ने 6 महीने में 3,323 भारतीयों को किया डिपोर्ट, इमिग्रेशन नियम सख्त होने से बढ़ी कार्रवाई
कनाडा में रह रहे भारतीय नागरिकों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 के पहले छह महीनों में 3,323 भारतीय नागरिकों को देश से निर्वासित (डिपोर्ट) किया गया है। यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों की तुलना में काफी अधिक है और कनाडा की सख्त होती आव्रजन (Immigration) नीति की ओर संकेत करता है।
कनाडा सरकार पिछले कुछ समय से देश में अस्थायी निवासियों की संख्या को नियंत्रित करने, वीजा नियमों को कड़ा करने और इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव करने पर जोर दे रही है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय छात्रों, अस्थायी विदेशी कर्मचारियों और स्थायी निवास (PR) के लिए आवेदन करने वालों पर भी पड़ रहा है।
2026 में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा
CBSA के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में कनाडा से निकाले गए विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक रही। इस दौरान कुल 3,323 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया।
इस अवधि में भारतीय नागरिकों की संख्या मैक्सिको समेत कई अन्य देशों के नागरिकों से अधिक रही। पिछले कुछ वर्षों में मैक्सिको कनाडा से निर्वासन के मामलों में सबसे ऊपर रहा था, लेकिन अब भारतीय नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
पिछले वर्षों में भी बढ़ा डिपोर्टेशन का आंकड़ा
कनाडा से भारतीय नागरिकों के निर्वासन का आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है।
CBSA के अनुसार:
2020: 1,424 भारतीय नागरिक डिपोर्ट किए गए
2021: 603 भारतीय नागरिकों को निकाला गया
2022: 786 भारतीय नागरिक डिपोर्ट हुए
2023: 1,132 भारतीय नागरिकों का निर्वासन हुआ
2024: यह संख्या बढ़कर करीब 2,004 तक पहुंच गई
2026 के शुरुआती छह महीनों में ही यह संख्या 3 हजार के पार पहुंच गई है।
भारतीयों को क्यों किया जा रहा है डिपोर्ट?
कनाडा से किसी भी विदेशी नागरिक को कई कारणों से निर्वासित किया जा सकता है। इनमें प्रमुख कारण हैं:
वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रहना
इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन
फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देकर वीजा हासिल करना
शरण (Asylum) आवेदन का खारिज होना
आपराधिक मामलों में शामिल होना
निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करना
हालांकि, CBSA अलग-अलग मामलों में डिपोर्टेशन के कारणों का रिकॉर्ड रखता है, लेकिन राष्ट्रीयता के आधार पर इन कारणों का विस्तृत डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाता है।
कनाडा क्यों सख्त कर रहा है इमिग्रेशन नियम?
कनाडा पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्रों और विदेशी कर्मचारियों को आकर्षित करता रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र भी पढ़ाई और नौकरी के लिए कनाडा जाते हैं।
लेकिन बढ़ती आबादी, आवास संकट (Housing Crisis), रोजगार दबाव और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते बोझ को देखते हुए कनाडा सरकार ने अस्थायी निवासियों की संख्या सीमित करने की नीति अपनाई है।
सरकार का कहना है कि इमिग्रेशन सिस्टम को व्यवस्थित करना जरूरी है ताकि देश में आने वाले लोगों की संख्या वहां की क्षमता के अनुसार हो।
भारतीय छात्रों और कामगारों पर असर
कनाडा भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए सबसे लोकप्रिय देशों में से एक रहा है। हर साल हजारों भारतीय छात्र कनाडा के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं।
हालांकि, नए नियमों के बाद:
स्टडी परमिट के नियम सख्त हुए हैं
कुछ श्रेणियों में वर्क परमिट सीमित किए गए हैं
वीजा जांच प्रक्रिया को कड़ा किया गया है
स्थायी निवास हासिल करना पहले की तुलना में कठिन हुआ है
इस कारण कई भारतीय आवेदकों को अब अधिक सावधानी के साथ दस्तावेज और इमिग्रेशन नियमों का पालन करना पड़ रहा है।
हजारों अन्य लोगों पर भी डिपोर्टेशन का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में अभी हजारों ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें लोगों को देश छोड़ने का आदेश दिया जा सकता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 7,669 और लोगों के डिपोर्ट होने की संभावना जताई जा रही है।
कनाडा में भारतीय समुदाय बड़ा और प्रभावशाली
कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है। शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य सेवा, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में भारतीय समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ऐसे में इमिग्रेशन नियमों में बदलाव और डिपोर्टेशन की बढ़ती संख्या भारतीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।
फिलहाल कनाडा सरकार अपनी आव्रजन नीति को और व्यवस्थित करने की दिशा में काम कर रही है, वहीं भारतीय नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि वे वीजा और निवास संबंधी सभी नियमों का सख्ती से पालन करें।
news desk MPcg