भारतीय मूल की महिला पर स्टूडेंट वीजा फ्रॉड का आरोप निकला झूठा, US अटॉर्नी ने बताया अमेरिकी नागरिक
अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की बायोमेडिकल इंजीनियर साधना गोलापुडी को लेकर सोशल मीडिया पर लगाए गए स्टूडेंट वीजा फ्रॉड के आरोपों पर अमेरिकी अधिकारी ने सफाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए साधना पर लंबे समय से F-1 स्टूडेंट वीजा पर रहने और वीजा नियमों का उल्लंघन करने जैसे आरोप लगाए गए थे। मामला सामने आने के बाद ह्यूस्टन के अमेरिकी अटॉर्नी एरॉन रीट्ज ने स्पष्ट किया कि साधना गोलापुडी नेचुरलाइज्ड अमेरिकी नागरिक हैं और वह स्टूडेंट वीजा पर नहीं हैं।
मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर साधना का कुचिपुड़ी डांस करते हुए वीडियो साझा कर उनके इमिग्रेशन स्टेटस पर सवाल उठाए गए। पोस्ट में उन्हें 2014 से F-1 वीजा पर रहने का दावा करते हुए वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। हालांकि, अमेरिकी अटॉर्नी की ओर से सार्वजनिक रूप से दी गई जानकारी के बाद इन आरोपों की सत्यता पर स्थिति साफ हो गई।
30 जुलाई को X पर पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जुलाई को ‘CyberGreen09’ नाम के X अकाउंट से साधना गोलापुडी को लेकर एक पोस्ट की गई थी। पोस्ट में दावा किया गया कि वह वर्ष 2014 से लगातार F-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में रह रही हैं।
F-1 वीजा अमेरिका में पढ़ाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए जारी किया जाता है। सोशल मीडिया पोस्ट में साधना के कुचिपुड़ी डांस का वीडियो भी साझा किया गया। इसके साथ उनके बारे में कई दावे किए गए और उन पर वीजा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया।
पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि साधना डांस और कैश ट्यूशन जैसे काम करती हैं। इसके आधार पर उनके वीजा स्टेटस पर सवाल उठाए गए और पोस्ट के साथ #visafraud हैशटैग का इस्तेमाल किया गया।
सोशल मीडिया पर पोस्ट तेजी से फैलने के बाद साधना और उनके परिवार को सार्वजनिक आरोपों का सामना करना पड़ा।
US अटॉर्नी ने सोशल मीडिया पर दी सफाई
मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आने के बाद ह्यूस्टन के US अटॉर्नी एरॉन रीट्ज ने 4 अगस्त को इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय ने मामले को देखा है और साधना गोलापुडी के बारे में लगाया गया स्टूडेंट वीजा वाला दावा सही नहीं है।
रीट्ज के अनुसार, साधना गोलापुडी एक नेचुरलाइज्ड अमेरिकी नागरिक हैं। यानी वह वर्तमान में F-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में रहने वाली विदेशी नागरिक नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका कार्यालय वीजा फ्रॉड के मामलों को गंभीरता से लेता है और ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाती है। हालांकि, साधना के मामले में अमेरिकी अटॉर्नी की ओर से दी गई जानकारी ने सोशल मीडिया पर लगाए गए उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें उन्हें लंबे समय से स्टूडेंट वीजा पर रहने वाला बताया गया था।
साधना ने भी सोशल मीडिया पर रखी अपनी बात
मामले के सामने आने के बाद साधना गोलापुडी ने 6 अगस्त को इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके कंटेंट को बिना अनुमति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दोबारा इस्तेमाल किया गया और उसके साथ गलत तथा भ्रामक दावे जोड़े गए।
साधना ने बताया कि पिछले कुछ दिन उनके और उनके करीबियों के लिए परेशान करने वाले रहे। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें उनके बारे में इस तरह की गलत जानकारी वाली पोस्ट दिखाई देती है, तो उसे रिपोर्ट किया जाए।
उनकी ओर से यह भी कहा गया कि उनके सोशल मीडिया कंटेंट को संदर्भ से अलग करके इस्तेमाल करने से उनके बारे में गलत धारणा पैदा हुई।
पोस्ट में डांस वीडियो को बनाया गया आधार
इस पूरे विवाद में साधना का कुचिपुड़ी डांस वीडियो भी चर्चा का केंद्र रहा। सोशल मीडिया पोस्ट में इसी वीडियो को साझा करते हुए उनके अमेरिका में रहने और वीजा स्टेटस पर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि, किसी व्यक्ति का सांस्कृतिक या पारंपरिक नृत्य करते हुए वीडियो अपने आप में उसके इमिग्रेशन स्टेटस का प्रमाण नहीं होता। साधना के मामले में भी अमेरिकी अटॉर्नी की ओर से दी गई जानकारी में उन्हें नेचुरलाइज्ड अमेरिकी नागरिक बताया गया।
इससे सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए F-1 वीजा से जुड़े दावे और अमेरिकी अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के बीच स्पष्ट अंतर सामने आया।
‘CyberGreen09’ अकाउंट को लेकर भी चर्चा
मामले में जिस ‘CyberGreen09’ अकाउंट से पोस्ट की गई थी, वह भी चर्चा में आया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस अकाउंट की प्रोफाइल में खुद को पाकिस्तानी अभिनेता हमजा सोहेल का फैन अकाउंट बताया गया था।
विवाद बढ़ने के बाद अकाउंट कुछ समय के लिए प्राइवेट भी किया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने अकाउंट को लेकर अलग-अलग दावे किए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।
इंडियन अमेरिकन एडवोकेसी काउंसिल ने जताई आपत्ति
मामले पर इंडियन अमेरिकन एडवोकेसी काउंसिल ने भी प्रतिक्रिया दी। काउंसिल ने सोशल मीडिया पर कहा कि एक अमेरिकी महिला को लाखों लोगों के सामने वीडियो के जरिए दिखाया गया और उसे वीजा फ्रॉडस्टर बताया गया, जबकि अमेरिकी अधिकारी के अनुसार वह अमेरिकी नागरिक हैं।
काउंसिल ने इस मामले में सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाए जाने और किसी व्यक्ति की पहचान एवं इमिग्रेशन स्थिति को बिना पुष्टि के सार्वजनिक रूप से संदिग्ध बताने पर सवाल उठाए।
काउंसिल ने अमेरिकी अटॉर्नी की प्रतिक्रिया में अवैध प्रवासियों को लेकर की गई टिप्पणी पर भी सवाल उठाया और पूछा कि साधना के खिलाफ गलत आरोप लगाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के बारे में इमिग्रेशन या कानूनी स्थिति से जुड़े दावों को बिना आधिकारिक पुष्टि के साझा किए जाने के जोखिम को भी सामने लाता है। अमेरिका में वीजा, नागरिकता और इमिग्रेशन स्टेटस से जुड़े दावे संवेदनशील विषय हैं और इनके बारे में गलत जानकारी किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और निजी जीवन पर असर डाल सकती है।
साधना गोलापुडी के मामले में सोशल मीडिया पोस्ट में उन्हें F-1 स्टूडेंट वीजा पर रहने वाला बताया गया था, जबकि ह्यूस्टन के US अटॉर्नी एरॉन रीट्ज ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह नेचुरलाइज्ड अमेरिकी नागरिक हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी की इस पुष्टि के बाद साधना पर लगाए गए स्टूडेंट वीजा फ्रॉड के आरोपों का आधार गलत साबित होता है। वहीं, सोशल मीडिया पर मूल पोस्ट करने वाले अकाउंट या उसके संचालक के खिलाफ किसी आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
news desk MPcg