अमेरिकी सांसद ने H-1B और ग्रीन कार्ड नियम सख्त करने की मांग की, भारतीय IT पेशेवरों पर पड़ सकता है असर
अमेरिका में H-1B वीजा और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। मिसौरी के रिपब्लिकन सीनेटर Eric Schmitt ने H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में बदलाव कर इसे और सख्त करने की मांग की है। उनके इस प्रस्ताव का असर बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका में टेक्नोलॉजी सेक्टर के हजारों भारतीय कर्मचारी H-1B वीजा के जरिए काम करते हैं और स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की प्रक्रिया में शामिल हैं।
सीनेटर एरिक श्मिट ने अमेरिकी श्रम विभाग से PERM (Program Electronic Review Management) श्रम प्रमाणन प्रक्रिया की समीक्षा और आधुनिकीकरण करने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था का कुछ कंपनियां गलत इस्तेमाल कर रही हैं और इससे अमेरिकी कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
H-1B और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया क्या है?
H-1B वीजा अमेरिका का एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रख सकती हैं। यह वीजा खासतौर पर तकनीकी, इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवरों के बीच लोकप्रिय है।
कई विदेशी कर्मचारी H-1B वीजा के बाद रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं। ग्रीन कार्ड मिलने के बाद व्यक्ति अमेरिका में स्थायी रूप से रहकर काम कर सकता है।
ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में PERM श्रम प्रमाणन एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी श्रमिकों के हितों पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारतीय पेशेवरों पर क्यों पड़ सकता है असर?
अमेरिकी टेक्नोलॉजी उद्योग में भारतीय पेशेवरों की बड़ी हिस्सेदारी है। बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में मंजूर हुए H-1B आवेदनों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी काफी अधिक रही। इनमें कई लोग छात्र वीजा, OPT (Optional Practical Training) और फिर H-1B रोजगार के रास्ते से अमेरिका में अपना करियर बनाते हैं।
अगर H-1B और ग्रीन कार्ड नियमों को सख्त किया जाता है, तो लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
अमेरिकी कर्मचारियों के हितों का दिया हवाला
सीनेटर एरिक श्मिट ने अमेरिकी श्रम विभाग को लिखे पत्र में कहा कि H-1B और PERM प्रणाली का कुछ कंपनियों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नियोक्ता विदेशी कर्मचारियों को कम लागत पर नियुक्त कर अमेरिकी कर्मचारियों के अवसरों को प्रभावित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नियमों का उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा करना और यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से स्थानीय कर्मचारियों को नुकसान न पहुंचे।
बदलाव लागू होने में लग सकता है समय
विशेषज्ञों के अनुसार, H-1B और ग्रीन कार्ड नियमों में किसी भी बदलाव के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अमेरिकी श्रम विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को प्रस्तावों की समीक्षा करनी होगी।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सीनेटर की मांग के बाद सरकार की ओर से किस तरह के बदलाव किए जाएंगे। हालांकि, इस मुद्दे ने अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों और आव्रजन नीति को लेकर चर्चा फिर तेज कर दी है।
भारतीय IT सेक्टर की नजर अमेरिकी नीतियों पर
अमेरिकी वीजा नीतियां भारतीय IT कंपनियों और पेशेवरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही हैं। Tata Consultancy Services, Infosys और अन्य बड़ी कंपनियां अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों के साथ काम करती हैं।
यदि भविष्य में H-1B या ग्रीन कार्ड नियमों में सख्ती होती है, तो इसका असर कर्मचारियों की नियुक्ति, स्थानांतरण और स्थायी निवास की योजनाओं पर पड़ सकता है। फिलहाल भारतीय पेशेवर और कंपनियां अमेरिकी आव्रजन नीतियों में होने वाले संभावित बदलावों पर नजर बनाए हुए हैं।
news desk MPcg