एमपी में गुरु पूर्णिमा पर आस्था का महासैलाब: दादा दरबार में डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, उज्जैन में इंजीनियर और कारोबारी ने छोड़ा संसार

एमपी में गुरु पूर्णिमा पर आस्था का महासैलाब: दादा दरबार में डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, उज्जैन में इंजीनियर और कारोबारी ने छोड़ा संसार

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को मध्य प्रदेश के मंदिरों, आश्रमों और संत स्थलों में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। प्रदेशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने अपने गुरुओं की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

सबसे बड़ा आयोजन खंडवा स्थित प्रसिद्ध श्री दादाजी धूनीवाले मंदिर में देखने को मिला, जहां गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर प्रबंधन के अनुसार मंगलवार रात 8 बजे से बुधवार सुबह 8 बजे तक करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने बड़े दादाजी श्री केशवानंद महाराज और छोटे दादाजी श्री हरिहरानंद महाराज की समाधियों के दर्शन किए।

सुबह होते-होते मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने दादाजी महाराज के दरबार में नारियल, फूल और प्रसाद अर्पित कर मनोकामनाएं मांगीं। मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं।

दादा दरबार में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

गुरु पूर्णिमा के मौके पर बढ़ी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई। मंदिर में करीब 90 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई। कंट्रोल रूम से दर्शन व्यवस्था, प्रवेश द्वार, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर नजर रखी गई।

गुम हुए श्रद्धालुओं को उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए अनाउंसमेंट सिस्टम भी लगाया गया। वहीं भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई।

धूनी माई में लगातार चढ़ाए जा रहे नारियलों के कारण तापमान बढ़ने पर मंदिर प्रबंधन ने कुछ समय के लिए नारियल अर्पित करने की प्रक्रिया को नियंत्रित किया। श्रद्धालुओं से नारियल अलग से एकत्र किए गए, जिन्हें बाद में परंपरा के अनुसार अर्पित किया जाएगा।

उज्जैन में इंजीनियर और कारोबारी ने अपनाया संन्यास

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन के प्रसिद्ध मौनी आश्रम में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। यहां दो युवकों ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यास ग्रहण किया।

बिहार निवासी 25 वर्षीय मनीष कुमार, जो एयर इंडिया में मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे, उन्होंने नौकरी छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। वहीं बरेली निवासी 35 वर्षीय संचित शर्मा, जो मुंबई में प्लेसमेंट एजेंसी का कारोबार करते थे, उन्होंने भी सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यास लिया।

दोनों ने विधि-विधान से मुंडन संस्कार कराया और अपना पिंडदान करने के बाद गुरु से दीक्षा ग्रहण की। मनीष कुमार ने बताया कि बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर था। वहीं संचित शर्मा ने कहा कि कारोबार और सफलता के बावजूद उनके मन में वैराग्य की भावना लगातार बढ़ रही थी।

सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक

उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में भी गुरु पूर्णिमा पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त की थी।

सुबह मंदिर के पट खुलने के बाद भगवान श्रीकृष्ण और गुरु सांदीपनि मुनि का पंचामृत अभिषेक किया गया। शिप्रा, गंगा और गोमती जल से अभिषेक के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। विश्व शांति की कामना से हवन और पूजा-अर्चना भी की गई।

बागेश्वर धाम में गुरु पूजन, ड्रोन से निगरानी

छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में भी गुरु पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। धाम में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सबसे पहले बागेश्वर बालाजी और अपने गुरु संन्यासी बाबा की समाधि पर पादुका पूजन कर आशीर्वाद लिया।

धाम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए ड्रोन कैमरों से पूरे परिसर की निगरानी की गई।

सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में उमड़ी भीड़

सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में भी गुरु पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सान्निध्य में गुरु वंदना और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्थाएं की गईं। भोजन प्रसादी वितरण, पार्किंग, सुरक्षा और सेवा कार्यों में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक जुटे रहे।

ओंकारेश्वर में गुरु परंपरा का स्मरण

खंडवा जिले की तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में भी गुरु पूर्णिमा श्रद्धा के साथ मनाई गई। आदि गुरु शंकराचार्य की दीक्षा स्थली माने जाने वाले इस क्षेत्र के मठों और आश्रमों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

मार्कण्डेय संन्यास आश्रम सहित कई स्थानों पर गुरु पूजन, धार्मिक अनुष्ठान और संत दर्शन के कार्यक्रम हुए। संतों ने गुरु के महत्व और आध्यात्मिक जीवन में मार्गदर्शन की भूमिका पर विचार रखे।

हरदा के 125 साल पुराने मंदिर में बारिश के बीच प्रभातफेरी

हरदा के करीब 125 वर्ष पुराने पट्टाभिराम मंदिर में आठ दिवसीय गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया जा रहा है। बुधवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में काकड़ा आरती हुई।

इसके बाद हल्की बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने प्रभातफेरी निकाली। मार्ग में आने वाले मंदिरों में ध्वज पूजन किया गया। पूरे क्षेत्र में भक्ति और आस्था का वातावरण देखने को मिला।

श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने चलाई विशेष ट्रेन

खंडवा में दादाजी मेले को देखते हुए रेलवे ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष मेमू ट्रेन संचालित की। यह ट्रेन खंडवा और सनावद के बीच चार फेरे लगाएगी।

विशेष ट्रेन के संचालन से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिली। ट्रेन का ठहराव अजंटी, अत्तर, कोटलाखेड़ी और निमाड़खेड़ी सहित प्रमुख स्टेशनों पर रखा गया।

गुरु पूर्णिमा पर पूरे प्रदेश में दिखी आस्था

इंदौर, ग्वालियर, रतलाम, देवास, मंदसौर, बैतूल, झाबुआ और अन्य जिलों में भी गुरु पूर्णिमा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिरों में पूजा, भजन-कीर्तन, कथा और भंडारों का आयोजन हुआ।

गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान, ज्ञान और संस्कारों को समर्पित दिन माना जाता है। मध्य प्रदेश में इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा को नमन करते हुए आस्था और विश्वास के साथ इस पर्व को मनाया।