इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिरों का संरक्षण करेगा भारत, ASI की टीम करेगी 240 प्राचीन मंदिरों का सर्वे
भारत-इंडोनेशिया सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा, भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण में मिलेगी भारतीय विशेषज्ञता
भारत अब विदेश में स्थित एक महत्वपूर्ण हिंदू सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में अहम भूमिका निभाने जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इंडोनेशिया के प्रसिद्ध प्रम्बानन हिंदू मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में तकनीकी सहयोग देगा। इसके लिए जल्द ही एएसआई की एक विशेषज्ञ टीम इंडोनेशिया के जावा द्वीप का दौरा कर मंदिर परिसर का प्रारंभिक सर्वे करेगी।
यह पहल भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इंडोनेशियाई सरकार ने प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण में भारत से सहयोग की इच्छा जताई थी। इसके बाद एएसआई ने इस परियोजना की तैयारी शुरू कर दी है।
ASI की तीन सदस्यीय टीम करेगी प्रारंभिक सर्वे
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की विशेषज्ञ टीम सबसे पहले प्रम्बानन मंदिर परिसर का विस्तृत निरीक्षण करेगी। टीम मंदिरों की वर्तमान स्थिति, संरचनात्मक नुकसान, उपलब्ध पुरातात्विक अवशेषों और पुनर्स्थापन की संभावनाओं का अध्ययन करेगी।
सर्वे के आधार पर एएसआई संरक्षण कार्य की रणनीति तैयार करेगा। इसमें मंदिरों के बिखरे हुए पत्थरों की पहचान, उनके मूल स्थान का निर्धारण और वैज्ञानिक तरीके से उन्हें दोबारा स्थापित करने की योजना बनाई जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि वर्षों से बिखरे पड़े स्थापत्य अवशेषों को सही क्रम में जोड़ना एक जटिल पुरातात्विक प्रक्रिया है।
दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर
इंडोनेशिया का प्रम्बानन मंदिर परिसर दुनिया के प्रमुख हिंदू स्थापत्य स्थलों में शामिल है। इसे दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है।
इसका निर्माण लगभग 850 ईस्वी में संजय (माताराम) राजवंश के शासनकाल में कराया गया था। यह मंदिर मुख्य रूप से हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित है।
मंदिर परिसर की वास्तुकला भारतीय संस्कृति और प्राचीन दक्षिण-पूर्व एशियाई स्थापत्य परंपराओं का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करती है।
240 मंदिरों वाला विशाल परिसर
इतिहास के अनुसार, प्रम्बानन मंदिर परिसर में मूल रूप से लगभग 240 मंदिर थे। हालांकि, समय के साथ भूकंप, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य कारणों से इनमें से अधिकांश मंदिर क्षतिग्रस्त हो गए।
आज परिसर में मुख्य मंदिरों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पत्थर और स्थापत्य अवशेष मौजूद हैं। इन्हीं अवशेषों को वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से दोबारा संरक्षित करना एएसआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।
पुरातत्व विशेषज्ञों को हर पत्थर की पहचान कर यह पता लगाना होगा कि वह मूल रूप से किस मंदिर या संरचना का हिस्सा था।
रामायण और महाभारत की झलक दिखाती हैं नक्काशियां
प्रम्बानन मंदिर परिसर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यहां मौजूद अद्भुत शिल्पकला है। मंदिर की दीवारों और पत्थरों पर रामायण और महाभारत के प्रसंगों को बेहद बारीकी से उकेरा गया है।
इन नक्काशियों में भारतीय पौराणिक कथाओं, धार्मिक परंपराओं और प्राचीन कला शैली की झलक देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन कलाकृतियों का संरक्षण केवल स्थापत्य बचाने का कार्य नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का प्रयास है।
1991 में UNESCO ने घोषित किया विश्व धरोहर स्थल
प्रम्बानन मंदिर परिसर को वर्ष 1991 में यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।
यूनेस्को की मान्यता मिलने के बाद यह स्थल दुनिया भर के पर्यटकों और इतिहासकारों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां प्राचीन हिंदू स्थापत्य और कला को देखने पहुंचते हैं।
भारत की पुरातात्विक विशेषज्ञता को मिलेगा वैश्विक मंच
एएसआई इससे पहले भी भारत और विदेशों में कई ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण में विशेषज्ञता प्रदान कर चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंडोनेशिया में प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना भारत की पुरातात्विक तकनीक और संरक्षण क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर होगी।
इस परियोजना से भारत की पहचान केवल एक सांस्कृतिक साझेदार के रूप में ही नहीं, बल्कि विरासत संरक्षण के क्षेत्र में विशेषज्ञ देश के रूप में भी मजबूत होगी।
भारत-इंडोनेशिया के प्राचीन संबंध होंगे मजबूत
भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंध हजारों वर्षों पुराने हैं। व्यापार, संस्कृति, धर्म और कला के माध्यम से दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है।
प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण में भारत की भागीदारी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को और मजबूत करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के बाद इस परियोजना को दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
प्रम्बानन मंदिर: प्रमुख तथ्य
स्थान: जावा द्वीप, इंडोनेशिया
निर्माण काल: लगभग 850 ईस्वी
निर्माता: संजय (माताराम) राजवंश
समर्पित: भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा
मूल मंदिरों की संख्या: 240
UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल: 1991
भारत की भूमिका: ASI विशेषज्ञ टीम द्वारा सर्वे और संरक्षण योजना
मुख्य चुनौती: ध्वस्त मंदिरों के बिखरे अवशेषों की पहचान और वैज्ञानिक पुनर्स्थापन
निष्कर्ष
इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण में भारत की भूमिका केवल एक पुरातात्विक परियोजना नहीं है, बल्कि हजारों साल पुरानी साझा सांस्कृतिक विरासत को बचाने का प्रयास है। एएसआई की विशेषज्ञता से उम्मीद है कि क्षतिग्रस्त मंदिरों और स्थापत्य अवशेषों को नई पहचान मिलेगी और भारत-इंडोनेशिया के ऐतिहासिक संबंध और मजबूत होंगे।
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